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    स्त्री प्रतिनिधित्व के बिना अधूरा है दलित आंदोलन- रजनी तिलक

    रजनी तिलक अपने लेखन के जरिये महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करने की दिशा में सार्थक पहल करने में जुटी हैं।  रजनी तिलक का जन्म 27 मई 1958 को पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पास कटरा राजाराम में हुआ। महिलाओं की आवाज़ बनने और दलित समाज की सेवा के लिए उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की नौकरी छोड़ दी। साहित्य का क्षेत्र हो या राजनीतिक,सामाजिक संगठनों का मंच, वो लगातार महिला हिस्सेदारी की आवाज़ पुरजोर तरीके से उठाती रही हैं। उनका ये प्रयास अनवरत जारी है। ‘पड़ताल’ की टीम ने उनसे साहित्यिक, सामाजिक आंदोलन से जुड़े कई पहलुओं पर ख़ास बातचीत की... जिसके कुछ ख़ास अंश आपके लिए पेश हैं।        आपकी पारिवारिक पृष्टभूमि क्या रही है, और साहित्य की तरफ आपका रुझान कब और कैसे हुआ ? मैं बहुत ही साधारण परिवार से संबंध…

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