उत्तराखंड- पिथौरागढ़ जिले के भारत-नेपाल सीमा से सटे ताड़ेगांव में फिर से एक दिल दुखा देने वाली खबर सामने आई है। गांव की 100 वर्षीय बुजुर्ग महिला झुपा देवी का हाल ही में निधन हो गया, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए गांव में चार लोग भी उपलब्ध नहीं थे। SSB के जवानों ने न सिर्फ बुजुर्ग महिला की अर्थी को कंधा दिया बल्कि अंतिम संस्कार भी करवाया।
दरअसल झुपा देवी के निधन के समय उनकी अर्थी को कंधा देने के लिए परिवार से केवल उनके बेटे रमेश चंद, पोते रवि चंद और गांव का एक अन्य व्यक्ति मौजूद था, परिजनों ने इसकी जानकारी ग्राम प्रधान दीपक बिष्ट को दी, ग्राम प्रधान ने सीमा चौकी पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) की यूनिट से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही SSB के जवान गांव पहुंचे और झुपा देवी की अर्थी को कंधा देकर काली नदी के तट पर स्थित श्मशान घाट तक ले गए, यह श्मशान घाट गांव से करीब दो किलोमीटर दूर है, जवानों ने न सिर्फ शव को ले जाने में मदद की, बल्कि पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भी सहयोग किया, इस मानवीय पहल से शोक संतप्त परिवार को संबल मिला और एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ हो सका।
ताजा घटना उत्तराखंड के सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में हो रहे पलायन की गंभीर स्थिति को उजागर करती है, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते युवा पीढ़ी शहरों की ओर पलायन कर चुकी है, कई गांवों में अब केवल बुजुर्ग ही रह गए हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी प्रभावित हो रही हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड में अब तक 1700 से अधिक गांव ऐसे हैं, जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ घोषित किया जा चुका है, जहां कोई स्थायी निवासी नहीं बचा है, ये खाली गांव पहाड़ों में गहराते सामाजिक संकट और जनसंख्या के लगातार घटते संतुलन की कहानी कहते हैं।
ऐसी विकट परिस्थिति में SSB का योगदान बहुत सराहनीय है जो परिवार का सहयोगी बना, सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए जवानों ने उस खालीपन को भरा, जो पलायन के कारण गांवों में पैदा हो गया है। झुपा देवी के परिवार के लिए SSB जवानों की मौजूदगी असहाय क्षणों में एक बड़ी ताकत बनी। वहीं, यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि अगर समय रहते पलायन पर रोक और गांवों के पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे दृश्य आम होते जाएंगे।
