img

अपनी जान गंवाकर दूसरों को ज़िंदगी देने वाले ‘अनिल’ को सलाम....

जीते तो सभी हैं लेकिन लेकिन दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो दूसरों के लिए जीते हैं, उन्हीं को सलाम करती है जिनमें ज़ज़्बा होता है दूसरों के लिए जीने और मरने का... बागपत का अनिल भी उन्हीं में से एक निकला। जिसने यमुना नदी में डूबते पांच लोगों की एक एक करके जान बचाई, लेकिन लोगों की जान बचाते-बचाते खुद जिंदगी खो बैठा लेकिन आखिरी सांस तक इसी कोशिश में लगा रहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचा सके।

रोज की तरह 14 सितंबर को अनिल भी रोज़ी रोटी कमाने के लिए नाव पर चढ़ा था। लेकिन उसे क्या पता था कि आज का ये सफर अधूरा ही रह जाएगा। और ज़िंदगी बीच रास्ते में ही धोखा दे जाएगी। उस रोज यमुना नदी में हुए नाव हादसे में मरने वाले 19 लोगों में से एक अनिल भी था,  लेकिन अनिल ने जो किया आज पूरा काठा गांव उसके हौसलें को सलाम कर रहा है। अनिल भी मजदूरी करता था और वो भी उसी नाव से हरियाणा जा रहा था, जो नाव हादसे का शिकार हुई। अनिल अच्छा तैराक था और जैसे ही नाव डूबने लगी वो तैरकर किनारे की तरफ चल दिया, लेकिन मदद के लिए चिल्लाते लोगों की चींख ने उसे वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। और अनिल ने एक-एक करके पांच जिंदगियां बचाईं,  लेकिन जब अनिल छठे शख्स को बचाने के लिए गया तो डूबते लोगों ने उसे पकड़ लिया कि पहले मुझे बचाओ, मुझे बचाओ, और इस तरह वे अनिल को भी अपने साथ ले डूबे। अनिल की मौत से परिवार में सदमे में है, परिवार के लोगों के आंसू अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहे है। आज पूरे गांव को अनिल पर नाज़ है।

अनिल के परिवार में बूढ़े मां-बाप, चार भाई और दो बहनें है। परिवार सदमे में जरूर है लेकिन उनके लाल ने जिस जिंदाजिली का परिचय दिया, उस उन्हें फक्र भी है,  गांव के लोग भी उसके हौसले को सलाम कर रहे है। अनिल हरियाणा से मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रहा था। अब वो चला गया तो परिवार पर गमो का पहाड़ टूट गया। अनिल का परिवार सरकार से एक नौकरी या आर्थिक मदद चाहता है। अनिल तो चला गया लेकिन समाज मे ये मिसाल कायम कर गया कि जिंदगी जिंदादिली का नाम है भले ही इसके लिए जान ही क्यों ना गंवानी पड़े। आज इसी जिंदादिली के कारण अनिल अपने गांव में ही नहीं , देशवासियों के दिलों में जिंदा हैं।  

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े