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मध्य प्रदेश सरकार का सामने आया जातिवादी चेहरा, पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के सीने पर लिखा एससी/एसटी

इस आधुनिक युग में भले कहा जा रहा हो कि भारत बदल रहा है, विकसित हो रहा है, लेकिन अनुसूचित जाति/जनजाति समाज के प्रति सरकारों और सामान्य वर्ग के लोगों की धारणा बिल्कुल भी नहीं बदली है। उन्हें जहां भी मौका मिलता है वो अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय देने से नहीं चूकते। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के धार जिले में देखने को मिला है। यहां पुलिस भर्ती प्रक्रिया में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों के सीने पर ही एससी/एसटी लिख दिया गया है। 



मध्य प्रदेश सरकार की ‘अजब-गजब’ कार्यशैली को लेकर पुलिस में सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। मध्य प्रदेश के धार जिले में पुलिस भर्ती में चयनित हुए पुलिस सिपाहियों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों/ कर्मचारियों ने अनोखा तरीका अपनाते हुए आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के सीने पर ही उनकी श्रेणी एससी/एसटी अंकित कर दिया, जिससे उनकी अलग से पहचान हो सके।

बताया जा रहा है कि इससे पहले हुई पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण में कुछ तकनीकी गड़बड़ी हुई थी, जिससे बचने के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों ने आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की अलग के लिए ये अनोखा तरीका निकाला है।

इस मामले को लेकर बहुजन समाज में गहरी नाराजगी है। उधर केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रामदास अठावले ने इसे अनुसूचित/जनजाति समाज के लोगों को अपमान बताया है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने ये भी कहा कहा कि वो इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भी लिखेंगे। 

हालांकि जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर आर सी पनिका का कहना है कि मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि अगर किसी भी अभ्यर्थी के सीने पर एससी/एसटी दर्ज किया गया है तो ये एक गंभीर बात है। सीएमओ पनिका का ये भी कहना है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया, इसकी जांच करेंगे। एसके साथ ही धार जिले के पुलिस अधीक्षक ब्रिजेंद्र सिंह ने भी अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जाति लिखने को बेहद दुखद बताया है। उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि इस घटना के जिम्मेदार की पहचान की जा सके। यहां सवाल उठता है कि जिला अस्पताल में पुलिस भर्ती प्रक्रिया का स्वास्थ्य परीक्षण चल रहा हो और सीएमओ साहब इससे कैसे अनभिज्ञ रह सकते हैं। ये भी जांच का विषय है।    

वैसे तो आपने टीवी चैनलों पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक सरकारी विज्ञापन जरूर देखा होगा, जिसमें वो अपने राज्य की तारीफ ‘एमपी गजब है, सबसे  अजब है’ कह कर करती है। जी हां मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान अनूसूचित जाति/जनजाति वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जाति की पहचान दर्ज करने से यहां ये साबित हो जाता है कि मध्य प्रदेश सरकार की कार्य शैली भी वास्तव में ‘एमपी गजब है, सबसे  अजब है’ को चरितार्थ करती साफ नज़र आ रही है।

मुख्य संवाददाता
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