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महोबा- भूख से दलित व्यक्ति की मौत

हम उस उन्नत देश के आधुनिक नागरिक है जिस देश में आज भी भूख से मौतें होती हैं, लेकिन हमारी सरकारें और प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनाएं इस कदर मर चुकी हैं कि वो ईमानदारी से इन्हें स्वीकार भी नहीं करना चाहती। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के घंडुआ गांव में एक दलित की भूख से मौत का मामला सामने आया है। हालांकि जिला प्रशासन भूख से मौत की बात को सिरे से खारिज कर रहा है। जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई दिनों से खाना न खाने के कारण ही मौत होने की पुष्टि हुई है।

गौरतलब है कि पिछले साल इसी जिले के ऐला गांव में नत्थू रैदास की भी भूख से मौत हुई थी, और  मामला संसद तक में गूंजा था। महोबा के अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) महेंद्र सिंह ने मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मृतक छोट्टन को मधुमेह की बीमारी थी और उसकी मौत इसी बीमारी की वजह से हुई है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि 'मृतक को कई दिनों से खाना नहीं मिला था, लेकिन यह भी संभव है कि वह बीमारी की वजह से खाना न खा सका हो। उन्होंने जानकारी दी कि मृतक के दाह संस्कार के लिए पांच हजार रुपये और परिवार के लिए पचास किलो अनाज दिया गया है। उधर, मृतक की पत्नी उषा का कहना है कि उसका पति बीमार जरूर था, लेकिन पिछले एक हफ्ते से घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है। मनरेगा की मजदूरी न मिलने की वजह से वह अपने पति का इलाज भी नहीं करा सकी और भूख व इलाज के अभाव में पति की मौत हो गई। 

मुख्य संवाददाता
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