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दलित उद्योगपतियों की सफलता की कहानी 'Dalit Enterprise'

शुक्रवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘दलित इंटरप्राइस’ पत्रिका का विमोचन किया। ये पत्रिका न्यूयॉर्क की मैगज़ीन ‘ब्लेक इंटरप्राइस’ की तर्ज पर है। हर महीने निकलने वाली ये पत्रिका पूरी तरह रंगीन होगी और इसमें 100 पेज होंगे।

पत्रिका के संपादक चंद्रभान प्रसाद ने बताया कि जब दलित का जिक्र होता है तो सिर्फ गरीबी, पिछड़ापन, अत्याचार जैसे मुद्दों पर ही चर्चा की जाती है। ये पत्रिका दलितों की सफलता की कहानी कहेगी। जिन दलित उद्योगपतियों ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपना एक मुकाम हासिल किया है, ये पत्रिका उनके संघर्षों के बारे में दुनिया को बताएगी, उनकी सफलताओं को सबके सामने रखेगी। जिससे उनकी हौंसलाफज़ाई हो और दूसरे लोगों को प्रेरणा मिले। और वे व्यवसाय की तरफ जाने के लिए प्रेरित हों।
  
आपको बता दें कि चंद्रभान प्रसाद जाने माने दलित चिंतक हैं और ‘दलित फूड’ और ‘ज़ीरो प्लस’ नाम से  कंपनी भी चलाते हैं। वे डिक्की (DICCI) के सलाहकार भी रहे हैं।  डिक्की के दिल्ली अध्यक्ष एन के चंदन ने कहा कि ये बहुत ही खुशी का मौका है जब भारत में पहली बार कोई दलित उद्योगपतियों को ध्यान में रखकर पत्रिका ला रहा है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
  
पैकेजिंग के व्यवसाय में अपनी अलग पहचान रखने वाले ‘कुमार एंटरप्राइसेस’ के मालिक धर्मेंद्र कैमवाल ने बताया कि चंद्रभान प्रसाद द्वारा की जाने वाली ये पहल बहुत कारगर साबित होगी। ये पत्रिका दलित उद्योगपतियों की बात लोगों तक तो पहुंचाएगी ही साथ ही सरकार और प्रशासन में भी हमारी आवाज़ पहुंचाने का जरिया बनेगी। आज के दौर में इस तरह की पत्रिका की बहुत अहमियत है। इससे ना सिर्फ दलित उद्योगपतियों को बल मिलेगा बल्कि बहुजन समाज के युवक-युवतियों को भी प्रेरित करेगी कि वो उद्योग और व्यापार की तरफ आएं। उन्होंने कहा कि अब दलितों को नौकरी के बजाए बिजनेस की तरफ बढ़ना होगा। तभी बहुजन समाज शिखर तक पहुंचेगा।   


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