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दिल्ली- स्वच्छता अभियान के नाम पर स्कूल में छात्र ढो रहे टॉयलेट का मलबा

PADTAL NEWS EXCLUSIVE 
मनीष सिसोदिया जी आप दिल्ली के सरकारी स्कूलों को वर्ल्ड क्लास का बनाने की जिस कवायद में लगे हैं उसकी वाकई सराहना की जानी चाहिए लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी इन कोशिशों पर कोई अंदरूनी रूप से पलीता लगाने में लगा हो। इसलिए सबसे पहले आपको ऐसे लोगों की पहचान कर नकेल कसने की जरूरत है वरना ऐसा ना हो जिस शिक्षा सुधार के लिए आप इतनी कवायद कर रहे हैं वो अंजाम तक ही ना पहुंचे। क्योंकि ये बताना तो सही नहीं होगा कि सिर्फ बिल्डिंग्स चमकाने से शैक्षिक स्तर नहीं सुधरेगा। सबसे पहले तो शिक्षकों के व्यवहार को ही ठीक करना होगा। और छात्रों के प्रति उनकी मानसिकता बदलनी पडेगी। शिक्षकों को बच्चों को भेदभाव से ऊपर रखकर देखना होगा... उनको इस मानसिकता से ऊपर उठना होगा कि जो बच्चे उनसे शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं वे गरीब परिवारों से हैं इसलिए उनसे कैसा भी व्यवहार करो, कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।
 
वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-
p://padtal.com/videos/view  

जी हां, हम आपके सामने एक ऐसी ही गंदी तस्वीर रखना चाहते हैं, जिसमें स्कूल के बच्चों से टॉयलेट का मलबा उठवाया गया। इस तस्वीर/वीडियो में दिख रहे ये बच्चे कमला नगर सेकेंडरी स्कूल के हैं,  जो अपने स्कूल में बन रहे टॉयलेट का मलबा उठा कर ले जा रहे हैं। इन्हें स्कूल वालों ने काम पर लगाया हुआ है कि टॉयलेट से निकल रहे मलबे को स्कूल के बाहर फैंक कर आओ। 

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कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपका विभाग इन सब कामों के लिए फंड नहीं देता हो और इसीलिए स्कूल के प्रिंसिपल साहब को मजबूरी में बच्चों से ऐसा काम करवाना पड़ रहा हो। वैसे आपके पास पुख्ता आंकड़े होंगे। हमारे आंकड़ों के मुताबिक इन स्कूलों में 90 फीसदी बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और शायद प्रिंसिपल साहब ये बात अच्छे से जानते हैं, और उन्हें लगता है कि गरीब के बच्चे का क्या मोल, उनसे कुछ भी कराओ।

हालांकि प्रिंसिपल साहब का कहना है कि हमने ऐसा कुछ नहीं कराया... और उन्होंने इस खबर को एक सिरे से खारिज़ कर दिया। लेकिन जब हमने पूछा कि ये फोटो और वीडियो... कहां से आ गए... तो प्रिंसिपल साहब इसे स्वच्छता अभियान का चोगा पहनाने लगे और बताने लगे कि आजकल तो पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है और हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी चाहते हैं कि सब लोग स्वच्छता अभियान से जुड़ें। लेकिन जितनी मासूमियत से प्रिंसिपल साहब ने ये बात कह दी उतने मासूम वो नहीं थे, प्रिंसिपल साहब क्या स्वच्छता अभियान के नाम पर मासूम बच्चों से टॉयलेट का मलबा उठवाएंगें... अगर ऐसी ही बात थी तो फिर क्या सिर्फ गरीब परिवारों के बच्चे ही रह गए हैं इस काम के लिए, आपने कभी खुद या अपने स्टाफ से डस्टिंग तक कराई है स्कूल में... टॉयलेट का मलबा ढोना तो दूर की बात है। 

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हालांकि ज्यादातर स्कूलों में गरीब बच्चों के साथ इस तरह के अमानवीय व्यवहार की खबरें अक्सर आती रहती हैं लेकिन अब, जब ये खबर दुनिया के सामने वीडीयो और फोटो के साथ आ ही गई है तो देखते है कि आप और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी इस स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं। और ऐसे प्रिंसिपलों की मानसिकता में कितना बदलाव ला पाते हैं। जो गरीबों के बच्चों को छात्र के रुप में नहीं बंधुआ मजदूर के रूप में देखते हैं। 

हालांकि पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने इस बात की शिकायत सरकार को लिखकर भेज दी है, लेकिन देखना ये है कि विभाग मामले में लीपापोती करता है या ऐसा उदाहरण पेश करता है कि सरकारी स्कूल का कोई भी प्रिंसिपल बच्चों के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार करने से पहले दस बार सोचे। 

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वैसे तो सरकारी स्कूलों में अब शायद ही कोई अपने बच्चे को भेजना चाहता हो, लेकिन जो माता-पिता अपने बच्चों को यहां भेजने के लिए मज़बूर हैं, उनका विश्वास बनाए रखना अब सरकार की जिम्मेदारी है, ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि ऐसे संवेदनहीन शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए ताकि अभिभावकों का विश्वास स्कूलों पर बना रहे और दूसरे लोग भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने में शर्म महसूस ना करें।  


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3 Comments

  •  
    Yogesh kumar
    2017-11-21

    Bahut achi baat h ke aaj ke zamane mai bhi aap jaise bhi log h jo aise khabr ko samjhte hai or duniya ke saamne rakh rahe h jiski or sayad koi dhyan bhi nahi deta i wish ke ye khabr sarkar tak pahuche or vo is par kuch kare.......

  •  
    Amit kumar singh
    2017-11-21

    Comment *

  •  
    Your Name *
    2017-11-20

    Very true situation of our govt. schools

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