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अगर जस्टिस लोया की मौत की जांच नहीं हुई तो न्यायपालिका पर कलंक लग जाएगा

सीबीआई जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध मौत पर चुप्पी तोड़ते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस एपी शाह ने कहा है कि 2014 में हुई जज लोया की मौत की परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए।

'द वायर' को दिए एक इंटरव्यू के दौरान जस्टिस शाह ने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ख़ुद ये निर्णय करना होगा कि इस मामले में जांच की ज़रूरत है या नहीं
, क्योंकि इन आरोपों की जांच न हुई तो न्यायापालिका पर कलंक लग जाएगा।

आपको बता दें कि उस समय वो मुंबई में विशेष सीबीआई अदालत के जज थे और बीजेपी के अमित शाह और गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। 1 दिसंबर 2014 को जज लोया नागपुर में एक शादी में हिस्सा लेने गए थे जहां उनकी मृत्यु हो गई गई।  उस वक्त बताया गया था कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।

लेकिन हाल ही में जज लोया की बहन ने 'द कैरेवन' नामक पत्रिका में उनकी मौत के हालात पर कुछ सवाल उठाए हैं। और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने भी आरोप लगाया है कि उनकी जान को खतरा हो सकता है। उनके परिवार का कहना है कि जज लोया को इस मामले में अनुकूलफैसला देने के एवज में उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह द्वारा 100 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी।

जस्टिस शाह ने वायर को दिए इंटरव्यू में कहा है कि 'परिवार के आरोपों की जांच न करने से न्यायपालिका को, विशेषकर निचली अदालतों को ग़लत संकेत जाएगा। उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे मामलों में जहां जांच करने के लिए प्रथम दृष्टया सामग्री (prima facie material) उपलब्ध हो, वहां जांच का आदेश देना बेहद ज़रूरी है, न्यायपालिका इस देश की सर्वोच्च संस्था है, लोग इस पर सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं. इस संस्था या इससे जुड़े किसी भी व्यक्ति के किसी गलत काम में लिप्त होने पर बात होनी चाहिए।

मुख्य संवाददाता
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