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अब गाजियाबाद के सीवरेज प्लांट में तीन की मौत, सरकारों की निष्क्रियता के कारण रुक नहीं पा रहा मौतों का सिलसिला

गाजियाबाद के लोनी इलाके में रविवार को जल निगम के मेन पंपिंग स्‍टेशन के टैंक में डूबने से दो सफाईकर्मियों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। पहले दो सफाईकर्मी इसमें डूबे थे, लेकिन बाद में उन्‍हें बचाने के लिए टैंक में उतरे तीसरे व्‍यक्ति की भी डूबने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान रोशन लाल, महेश और बुलबुल के रूप में हुई है। उनके शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गये हैं।

 रविवार सुबह करीब सवा नौ बजे सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट के पंपिंग स्‍टेशन की सफाई का काम शुरू हुआ था। इसके लिए रौशन लाल पंपिंग स्‍टेशन के टैंक में सफाई के लिए उतरे। सफाई करने के दौरान उनका दम घुट गया और वह अंदर पानी में गिर गए। उन्हें तलाशने के लिए महेश भी टैंक में उतरे दम घुटने के कारण वे भी नीचे ही गिर गए और उनकी भी मौत हो गई।

किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए बुलबुल भी टैंक में उतरे लेकिन हादसे का शिकार हो गए। उनके साथ ही चौथा कर्मचारी भी नीचे जाने के प्रयास में था लेकिन लेकिन तीनों की मौत हो जाने की आशंका के कारण वह रुक गया और उसकी जान बच गई। उसने घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी।
 
घटना की सूचना मिलते ही डिप्टी एसपी दुर्गेश कुमार समेत कोतवाली प्रभारी उमेश पांडे और भारी पुलिस फोर्स मौकै पर पुहंच गया। पर पुलिस के पास ऐसे संसाधन व उपकरण नहीं थे जिनकी मदद से वे लोग नीचे उतरकर तीनों को बचा पाते। ऐसे में पुलिस सिर्फ मूकदर्शक बनी रही। 10 मिनट बाद पुलिस ने एनडीआरएफ को सूचना दी। 

एनडीआरएफ की टीम 12:30 बजे मौके पर पहुंची और 15 मिनट बाद बचाव कार्य शुरू किया। टीम में शामिल कॉन्स्टेबल मुलायम और सोनू ऑक्सिजन मास्क लगा कर 40 फुट गहरे टैंक में उतरे और करीब 2 बजे महेश के शव को बाहर निकाला। इसके बाद ढाई बजे टीम ने बुलबुल का शव और अंत में 3 बजे रोशन लाल का शव बाहर निकाला। एनडीआरएफ के डिप्टी एसपी श्रीनिवास ने जानकारी दी कि टैंक में सीवर के पानी का बहाव तेज था। आशंका है कि सिल्ट जमी होने के कारण उससे मीथेन गैस बन गई होगी। चूंकि तीनों ने न तो मास्क पहना था और न ही सुरक्षा के अन्य उपाय थे। इस कारण गैस में दम घुटा और तीनों बेहोश होकर पानी के टैंक में गिर गए। चूंकि गैस के कारण बेहोशी थी और दम घुट रहा था इसके अलावा वे पानी में डूब गए, ऐसे में वह बाहर नहीं निकल पाए और उनकी मौत हो गई।  

लोनी पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जल निगम द्वारा एनवायरोकॉन इंजीनियरिंग, जिसके द्वारा मृतकों को काम पर रखा गया था, के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने कहा कि इन सफाईकर्मियों को कथित रूप से उपयुक्त उपकरण प्रदान न करने पर कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में चीफ इंजिनियर ने जल निगम के 3 इंजिनियरों को सस्पेंड कर दिया है। जानकारी के अनुसार सहायक अभियंता रामेश्वर कुमार, नीरज वर्मा व जूनियर इंजिनियर संतराम के पास इस कंपनी के काम पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी। पर इन्होंने लापरवाही बरती, ऐसे में इन्हें सस्पेंड किया गया है। वहीं जल निगम ने कंपनी को भी ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं गाजियाबाद जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) रितु माहेश्वरी ने कहा, ‘मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि जल निगम भी ज़िम्मेदार है. संचालन और सुरक्षा की देख-रेख में कोई स्थानीय अधिकारी मौजूद नहीं थे. इस मामले में उनकी ज़िम्मेदारी भी तय की जाएगी.’ डीएम रितु माहेश्वरी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर मुआवज़े के रूप में मृतकों के परिवार को 30,000 रुपये दिए जाएंगे. साथ ही ठेकेदार को भी मृतकों के परिवार को हर्जाना देना होगा. इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मदद की जाएगी.

पुलिस ने बताया दोनों कर्मचारियों में रोशन लाल सहारनपुर का रहने वाला था और इस प्लांट में काम करने से पहले  वह सफाई का काम करता था. महेश गाज़ियाबाद के गढ़ी गांव का था और इससे पहले जिले के एक अन्य प्लांट पर काम करता था।



मुख्य संवाददाता
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