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दलित संपन्न लोग ज़्यादातर ख़ुद को समाज से काट लेते हैं- श्रीराम हितैषी


श्रीराम हितैषी उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद शहर में दलित समाज की नाक माने जाते हैं और अपने उपनाम ‘हितैषी’ के मुताबिक दलित समाज के सच्चे हितैषी भी हैं । वो रविदास मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से समाज सेवा के साथ-साथ शिक्षा की अलख जगा रहे हैं । पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश । 

आपकी संस्था की स्थापना कब और कैसे हुई ?
करीब 45 साल से मैं समाज सेवा कर रहा हूं । रविदास मंदिर ट्रस्ट की जिस जमीन के दफ़्तर में हम बैठे हैं इसके लिए हमें एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी । एक तरफ जहां कुछ अपने ही समाज के असामाजिक तत्वों ने इस जमीन को बेचने का निर्णय कर रखा था, वहीं जीडीए इस जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था । हम इस लड़ाई कूद पड़े कि ये ज़मीन समाज की है और समाज के ही काम आएगी । हम इसमें कुछ और नहीं होने देंगे, जिसके लिए हमारे ऊपर कई बार हमले भी हुए । हमें 18 मुकदमों में उलझा दिया गया, लड़ाई झगड़े हुए, गोलियां तक चली, जेल भी गए । हमारे समाज के लोगों ने देखा कि हम निस्वार्थ भाव से समाज के लिए लड़ रहे हैं तो लोग भी हमारे साथ आए । हम इसमें स्कूल चलाते हैं । बीच-बीच में तकनीकि कोर्स से संबंधित कोचिंग की व्यवस्था भी करते हैं ।  हर साल समाज की गरीब लड़कियों की शादियां भी करवाते हैं । अभी इसमें हमारी आईटीआई संस्थान चलाने की भी योजना है ।

हर साल आयोजित होने वाले शादी समारोह में आप अभी तक कितनी शादियां करा चुके हैं ?
हम ये कार्यक्रम पिछले 20 साल से आयोजित करत आ रहे हैं और हजारों शादियां अभी तक करा चुके हैं ।  इससे समाज के गरीब लड़के-लड़कियों को लाभ मिल रहा है । इसके अलावा नई गृहस्थी शुरू करने के लिए जितना भी आवश्यक सामान होता है, हम वो सभी नव दंपति को उपहार स्वरूप देते हैं ।

इतने लंबे समय में आपने क्या-क्या समस्याएं महसूस की, जिनका जिक्र करना चाहते हों ?
दरअसल परेशानियां तो बहुत आती हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि हमारे समाज के ज़्यादातर संपन्न लोग खुद को समाज से काट लेते हैं । उनमें समाज सेवा और दान करने की भावना नहीं है ।

सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई हिंसा को आप किस रूप में देखते हैं ?
शब्बीरपुर की घटना बहुत ही दुख पहुंचाने वाली घटना है, जहां मासूम लोग हिंसा का शिकार हुए हैं । चंद्रशेखर शब्बीरपुर हिंसा का विरोध कर पूरे दलित समाज में चेतना जगाने का काम किया है ।  





         


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