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मुज़फ़्फ़रनगर में दलित युवती से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भड़की जातीय हिंसा, 18 लोग घायल, पुलिस बल तैनात

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुज़फ़्फ़रनगर जनपद 7 सितंबर 2017 (गुरुवार) को जातीय हिंसा की चपेट में आ गया। यहां रतनपुरी क्षेत्र के भूपखेड़ी गांव में दलित युवती के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना को लेकर ठाकुर और दलितों के बीच जमकर पथराव और फायरिंग हुई, जिसमें दोनों पक्षों के करीब 18 लोग घायल हो गए। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस फोर्स ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति को काबू में किया ।

जानकारी के मुताबिक भूपखेड़ी गांव में बुधवार की रात में दलित समाज के लोग गुरु समनदास जी के जन्मदिन मौके पर संत शिरोमणि गुरु रविदास आश्रम में सत्संग कर रहे थे, तभी ठाकुर समाज के युवकों ने दलित समाज की युवती के साथ छेड़खानी की और खींचने का प्रयास किया, जिससे वहां दलितों और ठाकुरों के बीच तीखी झड़प हो गई।  घटना की ख़बर मिलते ही रतनपुरी थाने की पुलिस ने मौके पहुंच कर दोनों पक्षों को समझाते हुए मामला शांत करा दिया था। लेकिन गुरुवार की सुबह होते ही छेड़छाड़ की घटना को लेकर ही ठाकुर और दलित समाज के कुछ युवक आपस में भिड़ गए और देखते ही देखते मामला खूनी संघर्ष बदल गया । मामला बढ़ता देख दोनों समुदायों के अन्य लोग आमने-सामने आ गए । बताया जा रहा है कि पहले ठाकुरों ने दलितों पर फायरिंग की, जिसके जवाब में दलितों की ने पथराव किया गया। इस खूनी संघर्ष के दौरान ठाकुरों ने गांव में लगी बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

जातीय हिंसा की ख़बर मिलते ही प्रशासन और पुलिस के आलाधिकारी समेत कई थानों की पुलिस और पीएसी का अमला गांव में पहुंच गया और किसी तरह हालात को काबू में किया। इसके लिए पुलिस को भीड़ पर लाठियां भी चलानी पड़ी । लेकिन इस खूनी संघर्ष में दलित समाज के 10 से ज़्यादा और ठाकुरों की तरफ से करीब 4 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है, जिसे देखते हुए भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।  वहीं इस मामले में एसपी देहात का कहना है कि घटना की जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि पिछले दिनों पश्चिमी यूपी में सहारनपुर के बाद कई अन्य जिलों में भी जातीय हिंसा की घटनाएं हुई थीं। जिसमें कई लोगों की जान भी गई थी। अब यहां सवाल उठता है कि सभ्य समाज का दम भरने वाले लोग आखिर कब तक आपस में जाति और धर्म के नाम पर लड़ते और बंटते रहेंगे। इसके अलावा सत्ता के सिंहासन पर बैठे राजनेताओं का भी कुछ नैतिक धर्म बनता है कि राज्य में अच्छा सुशासन और ऐसा माहौल पैदा करे कि कोई भी इंसान कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न जुटा सके। 

मुख्य संवाददाता
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