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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन

पूर्व प्रधानमंत्री व बीजेपी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को शाम 5.5 मिनट पर दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। पिछले 36 घंटों से उनकी हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई थी, तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। वह 93 वर्ष के थे। कल (शुक्रवार को) राजघाट के पास स्थित राष्ट्रीय स्मृति भवन में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

वाजपेयी को मूत्रनली में संक्रमण, गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकड़न आदि की शिकायत के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह से पीड़ित 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री का सिर्फ एक ही गुर्दा काम कर रहा था। एम्स की ओर से गुरुवार को जारी मेडिकल बुलेटिन में इस बात की पुष्टि की गई है। एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है, ‘दुख के साथ हम यह सूचना साझा कर रहे हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त को दोपहर बाद 5:05 बजे हो गया।’ 
बुलेटिन में कहा गया है कि दुर्भाग्य से पिछले 36 घंटे से उनकी हालत में लगातार गिरावट आ रही थी और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. एम्स की ओर से कहा गया है कि हरसंभव प्रयास के बाद भी हम  वाजपेयी को नहीं बचा पाए। एम्स ने कहा कि हम पूरे देश को हुई इस अपूरणीय क्षति एवं दुख में शरीक हैं। 
केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। देश भर में सात दिन तक राष्ट्र ध्वज आधा झुका रहेगा; राजकीय सम्मान के साथ अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय राजधानी स्थित उनके आवास पर ले जाया जा रहा है, जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकते हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार 17 अगस्त की शाम चार बजे दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर होगा।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक प्रचारक बने। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कुल मिलाकर 47 साल तक संसद के सदस्य रहे, वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए।

वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। 1996 में केंद्र की सत्ता में भाजपा की ताजपोशी वाजपेयी की कमान में ही हुयी थी। हालांकि यह सत्ता मात्र 13 दिन (16 मई 1996 से 01 जून 1996 तक) की थी। वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व के बल पर ही भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार 1998 में फिर सत्ता में लौटी और इस बार 13 महीने (19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999) में ही गिर गई। अक्टूबर 1999 में बनी भाजपा की अगली सरकार ने उनके नेतृत्व में अपना कार्यकाल (13 अक्टुबर 1999 से 22 मई 2004) पूरा किया।

मुख्य संवाददाता
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