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अंबेडकर भवन में सेमीनार, बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धम्म ही क्यों अपनाया ?

नई दिल्ली- 27 अगस्त, 2017- रविवार को अंबेडकर भवन में बहुजन समाज के वकीलों ने एक सेमीनार का आयोजन किया, सेमीनार का विष्य था विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने “ तथागत बुद्ध के वैज्ञानिक धम्म ‘ बौद्ध धम्म ’ को ही क्यों चुना “ एवं भारतीय समाज में जातिभेद, वर्ण व्यवस्था अन्धविश्वासों व साम्प्रदायिकता को समूल नष्ट करने, व विश्व शांति स्थापित करने के लिए बुद्ध धम्म ही सक्षम है।

कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट आई. आर. सिंह ने किया, कार्यक्रम में सेवानिवृत ऐडीजे नेपाल सिंह, एडवोकेट ज्योति प्रकाश, एडवोकेट सुरजीत सिंह, एडवोकेट ज्ञान मित्रा, एडवोकेट राजेंद्र सिंह, एडवोकेट के. एल. राजौरा, एडवोकेट सतीश कुमार, एडवोकेट योगेश मेहरा, सुनील गौत्तम, एडवोकेट राकेश कुमार, एडवोकेट मदन लाल, एडवोकेट लक्ष्मण सिंह, एडवोकेट सिद्धार्थ, एडवोकेट बुद्धप्रिय जे.पी., एडवोकेट राजकुमार, एडवोकेट हर्ष प्रिया, और बहुत सारे विद्वान और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। और अपने मूल्यवान विचार सबके सामने रखे।

एडवोकेट आई.आर. सिंह ने बोलते हुए कहा कि मानव की गुलामी खत्म करने की शुरूआत भगवान बुद्ध ने ही की थी। भगवान बुद्ध ने कहा था कि ,यदि मैं अपनी अंगुली से चंद्रमा को दिखाता हूं तो चंद्रमा को देखो, मेरी अंगुली को नहीं, मैं मार्ग दाता हूं, मोक्ष दाता नहीं हूं। बुद्ध ने कहा है मेरा धम्म बेड़े की तरह सागर को पार करने के लिए है, सिर पर बोझ बनकर ढोने के लिए नहीं हैं। एडवोकेट सुरजीत ने कहा कि हमें पावर ऑफ एजुकेशन को समझना पड़ेगा, सिर्फ अकेले बाबा साहब पढ़ सके, इसलिए उनकी वजह से ही लाखों करोड़ों पढ़-लिख सके। एमसीडी में कार्यरत सुधीर राज सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध ने इसे कभी भी धर्म नहीं कहा, उनके जाने के बाद ही ये धम्म बना। भगवान बुद्ध राजपरिवार से थे उन्होंने खुद प्रेक्टिल किए और उन्हें लोगों के सामने रखा। बुद्ध धम्म पढ़कर या शिक्षा लेकर पैदा नहीं हुआ ये प्रेक्टिकल पर आधारित है और पूरी दुनिया में ऐसा कोई दूसरा धर्म नहीं है।

रिटायर्ड ऐडीजे नेपाल सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध ने बताया कि अपने दुखों का कारण हम खुद हैं इसलिए उनका समाधान भी हमारे ही पास है। अगर आप धम्म को खूब समझते हैं, मानते हैं लेकिन उस पर अमल नहीं करते हैं तो इसे मानने-समझने का कोई फायदा नहीं है। हमें धम्म को आचरण में लाना होगा। प्रोफेसर एस सी जोशी ने कहा कि बौद्ध धम्म में बहुजन हित छिपा है, अकेला बौद्ध धम्म ऐसा है जो ये नहीं कहता कि तुम मुझे मानो, वो कहता है कि आप खुद समझों और अपने तर्कों पर तोलो उसके बाद जो ठीक लगे वो करो। वरना सारे धर्म लालच देकर, या जोर जबरदस्ती कर अपने में शामिल करने पर जोर देते हैं। कांग्रेस से पूर्व निगम पार्षद तरूण कुमार का कहना ने बताया कि बौद्ध धम्म में ही पूरी मानव जाति का कल्याण छिपा है, जब भारत में बौद्ध धम्म तो भारत सबसे ज्यादा ताकतवर और उन्नत देश कहलाता था।

शायद इसीलिए मशहूर वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है कि, “बुद्ध का धर्म संसार का भावी धर्म होगा”।

एच.सी. वेल्स ने बुद्ध के लिए कहा है कि “Buddha is Godless & He is God Like. ” बुद्ध का धम्म विज्ञान से नहीं डरता है। विज्ञान केवल बुद्ध के धम्म का ही समर्थन करता है।

बाबा साहब ने कहा था कि मैं हिंदु धर्म में पैदा तो हुआ, क्योंकि इस पर मेरा वश नहीं था, लेकिन मैं हिंदु धर्म में मरूंगा नहीं। इस घोषणा के बाद बाबा साहब ने बहुत सारे धर्मों का अध्ययन किया, उन्हें पढ़ा, समझा और करीब 30 साल बाद 14 अक्टुबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धम्म अपनाया। लेकिन बहुजन समाज उनकी मेहनत और समझ का फायदा नहीं ले पा रहा है।  


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