img

चंद्रशेखर आजाद 'रावण' की रिहाई के लिए CJP ''सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस'' का ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान

उत्तर प्रदेश-  सहारनपुर के शब्बीर में दलितों के घर जलाए जाने के मामले में जांच के लिए प्रदर्शन करने के बाद चर्चा में आए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की रिहाई के लिए ''सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस'' संस्था ने ऑनलाइन हस्ताक्षर कैंपेन शुरू किया है।

मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लोगों के साथ खड़ी होने वाली इस संस्था ने पिटीशन में बताया है कि कैसे चंद्रशेखर को योगी सरकार गलत तरीके से जेल में ही रखने की कोशिश कर रही है। अगर आपको भी लगता है कि चंद्रशेखर आजाद (रावण) के साथ गलत हो रहा है तो इस पिटीशन पर साइन कर अपनी सहमति जताकर चंद्रशेखर को न्याय की लड़ाई में सीजेपी की मुहिम को समर्थन दे सकते हैं। इस पिटीशन पर बीजी कोलसे पाटिल (रिटायर्ड जज बॉम्बे हाई कोर्ट), जस्टिस पीबी सावंत (रिटायर्ड जज सुप्रीम कोर्ट और भीम आर्मी के कन्वेनर प्रदीप नरवाल ने भी समर्थन देते हुए सिग्नेचर किया है। इस पिटीशन के बारे में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा गया है। 

पिटीशन पर हस्ताक्षर के लिए यहां क्लिक करें
https://www.change.org/p/free-chandrashekhar-azad-ravan-petition-to-shri-yogi-adityanath-chief-minis...

आपको बता दें कि यूपी की योगी सरकार ने 23 जनवरी को एक आदेश पास कर भीम आर्मी के चंद्रशेखर आज़ाद पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की मुद्दत तीन महीने के लिए बढ़ा दी। यूपी सरकार ने यह कदम तब उठाया है जब कि चंद्रशेखर को एक-दो नहीं 27 अलग अलग केस में ज़मानत मिल चुकी है. योगी सरकार ने 1 नवंबर को चंद्रशेखर पर "रासुका" पहली बार उस समय लगाई थी जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गयी थी। 

चंद्रशेखर आजाद पर रासुका लगाए जाने की तीखी आलोचना हो रही है लेकिन चंद्रशेखर आजाद को पिछले 9 महीनों से जेल में बंद रखा गया है। गरीब दलित परिवार के बच्चों की पढ़ाई के लिए जागरुक करने वाले संगठन भीम आर्मी ने 350 स्कूल खोले थे जिसमें गरीब दलित परिवार के बच्चों को पढ़ाया जाता था, चंद्रशेखर के जेल जाने के बाद से ये भी बंद पड़े हैं।

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े