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हिन्दुत्ववादी आतंकवाद का बदलता चेहरा

बहुजन नजर से...

6 दिसंबर 1992 हिन्दुत्ववादी आतंकवादियों ने 600 वर्ष पुरानी बाबरी मस्जिद ढहा दी। तब के उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय से शपथ पत्र सादर किया था कि उत्तरप्रदेश सरकार बाबरी मस्जिद की हर हालात में सुरक्षा करेगी। उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपना वचन निभाने मे खोटी साबित हुई । केन्द्र और राज्य सरकार के पास हजारों की संख्या में पुलिस बल होने के बावजूद भाजपा की सरकार ने इस देश की जनता के साथ, सुप्रीम कोर्ट के साथ विश्वासघात किया। इस विश्वासघात को अब 25 वर्ष हुए।
  
25 वर्षों के बाद हिदुत्ववादी आतंक का एक दूसरा चेहरा हाल ही में देश की जनता के सामने आया। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को साध्वी के यौन शोषण के मामले में सी.बी.आई. की अदालत ने 15 वर्ष के बाद दोषी करार दिया। अदालत को फैसले का ऐलान होते ही डेरा समर्थकों ने हिंसा का ऐसा तांडव खेला जिसमें 37 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए। चार राज्यों की सरकार सकते मे आ गई। रेलवे को 236 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। 500 से अधिक कार,  बसें और सरकारी वाहनो को आग लगा दी गई। अरबों रुपये की सरकारी तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। भाजपा सरकार की गलती से।
  
इस संदर्भ में सजा की घोषणा से पूर्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी थी की फैसले के बाद हिंसा हो सकती है। इसलिये हिंसा रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। इसके बावजुद 1लाख 50 हजार से ज्यादा लोग पंचकुला मे कैसे पहुंचे।
  
अब तो यह सच भी सामने आया है कि हरियाणा चुनाव से पूर्व भाजपा ने राम रहीम को आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार बनने पर उन्हे बलात्कार और अन्य मामलो से छुटकारा दिलवाया जाएगा। इसलिए राम रहीम को हरियाणा चुनाव में अपने भक्तो को आदेश दिया था कि वे भारतीय जनता पार्टी को ही वोट दें। जैसा कि समाचार पत्रो में प्राप्त जानकारी से डेरा सच्चा सौदा के लगभग 30 से 40 लाख समर्थक हरियाणा में ही रहते है और पुरे विश्व में 5 करोड़ से अधिक भक्त हैं। कितने आश्चर्य की और हैरत की बात है कि एक बलात्कारी इंसान में 5 करोड़ लोग आस्था और श्रद्धा रखते हैं। देश में ही नही अपितु विदेशों मे भी। हिन्दुत्ववादी विचारधारा में कितनी अंधश्रध्दा है और विवेक तथा तर्क का अभाव है।

हिन्दुत्ववादी आतंकवाद का केवल ऐसा ही घिनौना चेहरा नही, शायद इससे भी भयंकर घिनौना चेहरा इस देश की जनता नही जानती कि वेद पुराण केन्द्र काशी, संस्कृति रक्षा संघर्ष समिति ने दीपा मेहता की फिल्म ‘वाटर’ की शुटिंग में गड़बड़ी फैलाने के बाद वाराणसी में सिनेमा हॉल के मालिक को यश चोपड़ा की ‘मोहब्बतें’  फिल्म से 2 चित्रों को निकालने पर मजबूर कर दिया था। क्योंकि इस फिल्म मे अभिताभ बच्चन को जूते पहन कर गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए दिखाया गया था। इतना ही नही अपितू दिलीप कुमार के घर के सामने चड्ढी-बनियान पहनकर बेतुका प्रदर्शन भी इन्ही हिन्दुत्ववादियों ने किया था,  गौरक्ष बनकर गाय की रक्षा के नाम पर मुसलमानों को सरेआम मरवाना, आए दिन चल रहा है ।  

बाबा साहब डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखित ’’रीडल्स ऑफ हिन्दुइज़्म’’ पुस्तक के विरोध में शिवसेना ने मुंबई मे बहुत बडा विरोध आंदोलन छेड़ा था, जिसके जवाब में आंबेडकरवादियों ने उससे भी बहुत ब़डा मोर्चा निकाला था,  तब जाकर महाराष्ट्र सरकार ने बाबासाहब की वह किताब प्रकाशित की थी।  

भाजपा का विगत 50 वर्षों का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि चाहे भाजपा हो या भारतीय जनसंघ,  इन्होने इस देश में सांप्रदायिकता फैलाकर हिन्दुत्ववादी  आतंकी विचारों के सहारे सत्ता हासिल करने का प्रयास किया है। साम्प्रदायिक दंगो की राजनीति भाजपा का सबसे बड़ा हथियार है। 18 सितंबर 1969 मे गुजरात के अहमदाबाद का साम्प्रदायिक दंगा जिसमें हजारों मुसलमानों को टारगेट बनाया गया,  1971 दिसम्बर केरल के तेलीचेरी दंगो में भी मुसलमानों की पिटाई की गई,  अप्रैल 1979 को जमशेदपुर दंगे की रपट में जस्टिस जितेन्द्र नारायण आयोग ने साम्प्रदायिक भावना भड़काने के लिए आर.एस.एस. को ही जिम्मेदार ठहराया। 2002 का गुजरात दंगा, जिसमें 2000 मुसलमानो का कत्लेआम किया गया। जस्टिस वी. कृष्णा अय्यर आयोग ने तो नरेन्द्र मोदी पर 302 के तहत मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। इस देश में जितने भी साम्प्रदायिक दंगे हुए उसके लिए नियुक्त न्यायिक आयोगों ने भाजपा, आरएसएस और उनके अधिन संगठनों को ही दोषी करार दिया। मुंबई दंगो के लिए बनाये गए जस्टिज श्रीकृष्णा आयोग ने हिन्दुत्ववादियों को ही दोषी पाया। इसके बावजुद भाजपा के नये अनधिकृत प्रवक्ता डॉ. सुब्रम्हयम या यों कहे कि भाजपा का छोडा हुआ सांड कभी भी और कहीं पर भी अपनी नाक चुभोते रहता है। राम मंदिर की बात हो,  भ्रष्टाचार की बात हो। अभी हाल ही में डेरा सच्चा सौदा पर न्यायालय द्वारा दोशी पाने पर डॉ. स्वामी ने बयान दिया कि विराट हिन्दु को टारगेट बनाया जा रहा है। साम्प्रदायिकता का ही बयान है। साक्षी महाराज द्वारा राम रहीम के समर्थन में खड़े होना या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष,  2002 के गुजरात हत्याकांड के खलनायक जिसमें 2000 मुसलमानों का कत्लेआम किया गया था, तबके गृहमंत्री,  अमित शाह द्वारा पंचकुला न्यायालय पर दंगे करवाने का आरोप,  न्यायालय की अवमानना करना ही है।
  
प्रधानमंत्री मोदी जी चाहे जो कहें,  उनके बयानों में भी और कार्यशैली में भी हिन्दुत्ववाद की ही झलक नजर आती है। वरना मस्जिद और शमशान भूमि या ईद और त्यौहार की चर्चा उत्तरप्रदेश विधान सभा चुनाव में ना करते ।


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