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लखनऊ में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद जी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दौरा किया। लखनऊ पहुंचने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अमौसी एयरपोर्ट पर राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोगों ने भव्य स्वागत किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने तय कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले दिवंगत बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद को श्रद्धांजलि दी। 



राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने लखनऊ प्रवास के दौरान अमौसी एयरपोर्ट से सबसे पहले रिसालदार पार्क स्थित बौद्ध विहार पहुंचे, जहां उन्होंने बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बौद्ध धर्म की दीक्षा देने वाले बौद्ध भिक्षुओं में शामिल रहे ऐसे महान व्यक्तित्व की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने भी दिवंगत बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने जानकारी देते हुए बताया कि बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद के क्रियान्वयन (अंतिम संस्कार) के लिए अब 17 दिसंबर को यात्रा निकाली जाएगी। 



90 वर्षीय बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद का 30 नवंबर को सुबह करीब 11 बजे लखनऊ स्थित केजीएमयू के गांधीवार्ड में निधन हुआ था। तब से उनका पार्थिव शरीर बौद्ध विहार में जनता के दर्शन के लिए रखा हुआ है। इस दौरान कई उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, यूपी के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती समेत बहुजन समाज के कई नेता और सामाजिक संगठनों के नेता दिवंगत बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद को श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं। 



श्रीलंका में जन्मे बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद 1942 में भारत आए थे और वो लखनऊ के रिसालदार पार्क के बुद्ध विहार में रहते थे। वो बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाने वाले सात भिक्षुओं में शामिल रहे थे।



जानकारी के मुताबिक बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर सन 1948 और 1951 में लखनऊ आगमन के दौरान रिसालदार पार्क के बुद्ध विहार में आए थे। इसी दौरान उन्होंने भिक्षु प्रज्ञानंद से बौद्ध धर्म अपनाने की इच्छा जाहिर की थी। बाबा साहब को बौद्ध धर्म की दीक्षा भंते बोधानंद को देनी थी, लेकिन उनकी अचानक मौत होने की वजह से ये जिम्मेदारी भंते चंद्रमणि महाथेरो को सौंपी गई थी। 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर स्थित दीक्षा भूमि पर बौद्ध भिक्षु चंद्रमणि महाथेरो ने प्रज्ञानंद समेत 7 भिक्षुओं के साथ मिलकर बाबा साहब अंबेडकर और उनकी पत्नी को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई थी। इन सभी सातों बौद्ध भिक्षुओं में अंतिम प्रज्ञानंद ही अभी तक जीवित थे।

ओम प्रकाश
ओम प्रकाश
ब्यूरो चीफ
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