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धड़ों में बंटी बामसेफ को जोड़ने की कवायद

नई दिल्ली, 30 जुलाई 17, नेशनल फूले अंबेडकराइट एक्टिविस्ट एंड ऑर्गेनाइजेशन ने करोल बाग के गुरु रविदास मंदिर में 29 और 30 जुलाई को दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में 13 धड़ों में बंटी बामसेफ को जोड़ने पर चर्चा की गई। गोष्ठी में देशभर से लगभग 23 लोगों ने शिरकत की, इनमें ज्यादातर बामसेफ से जुड़े पुराने लोग रहे,  गोष्ठी में सभी ने अपने अपने विचार रखे, गोष्ठी का संचालन कर रहे एडवोकेट राम खोब्रागड़े जी ने बताया कि हम चाहते हैं कि जो लोग जिस भी प्लेटफॉर्म से जुड़कर काम कर रहे हैं वे अपनी-अपनी संस्थाओं में जुड़े रहें, अपने पदों पर रहें लेकिन सामाजिक न्याय के आंदोलन को आगे बढ़ाने में साझा सहयोग करें। हम किसी के भी कार्यक्षेत्र में दखलंदाजी नहीं करना चाहते, और इसी उद्देश्य से ये बैठक बुलाई गई है, और इस विषय पर सबके विचार जानने की कोशिश की गई है।
दो दिन तक चली इस चर्चा में इस बात को लेकर सहमति बनी कि ये एक बहुत अच्छा विचार है, अगर हम सब एकजुट होकर काम करेंगे तो उसका असर भी अच्छा होगा, और आंदोलन को मजबूती मिलेगी। एक और जो बड़ा फैसला लिया गया वो ये कि इसमें सिर्फ कई धड़ों में बंट चुकी बामसेफ को ही नहीं अन्य स्तरों पर भी लोगों को जोड़ने की जरूरत महसूस की गई, जिसके लिए यूथ और छात्रों को भी साथ लेकर चलने पर विचार किया जा रहा है। इस मुद्दे पर विचार मंथन के लिए अक्टुबर के पहले सप्ताह में देहरादून में दो दिवसीय बैठक की जाएगी, जिसकी तारीख अभी तय नही है, जिसमें बामसेफों के पदाधिकारियों व सदस्यों के अलावा समाज से जुड़े संगठनों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा छात्र व यूथ स्तर पर जो संगठन काम कर रहे हैं उन्हें भी इस बैठक में बुलाया जाएगा। एडवोकेट राम खोब्रागड़े, रूपचंद सेठ, बेवार भाई राठौड़, एडवोकेट भूपसिंह, चिरंजीलाल, विनोद कुमार पन्ना, जितेंद्र कुमार, मदनपाल और जोगिंदर सिंह ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
गोष्ठी में देश के कई राज्यों से आए सभी लोगों ने एक स्वर में ये माना कि अगर हम आज भी एक नहीं हुए तो बहुत देर हो जाएगी, यहां बैठे जितने भी लोग हैं इनमें से कोई भी बिकाऊ नहीं है, ये सब समाज के लिए न्यौछावर होने वालों में से हैं, पुरानी बामसेफ से जो भी जुड़ा रहा है वो इस बात का गवाह है कि यहां बैठे हर आदमी ने किस तरह से निस्वार्थ तन,मन, धन से कांशीराम जी की बामसेफ को खड़ा करने में अपना जीवन लगा दिया था। सबने माना कि बामसेफ टूटने के कुछ भी कारण रहे हों लेकिन हमें फिर से एकजुट होना होगा, और टूटे-बिखरे समाज को सही राह पर लाने के साथ-साथ समाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाना पड़ेगा। आज के समय में कोई नहीं दिखता जो बाबा साहब के बताए रास्ते पर काम कर रहा हो, सिर्फ बामसेफ ही है जो बाबा साहब की विचारधारा को ईमानदारी से अपनाया है। हम लोगों की नालायकी की वजह से ये लोग हुक्मरान बने हुए हैं, हमने ब्राह्म्णों और आरएसएस को चुनौती तो दे दी लेकिन चुनौती देकर घर में बैठ गए, लेकिन हमारी चुनौती की वजह से वे सतर्क हो गए, और हमको नेस्तनाबूद करने के षड़यंत्र रच डाले। मनुवादी हमें खंड खंड करने में लगातार सफल होते दिख रहे हैं जिसके परिणाम हम सबके सामने हैं कि आज देशभर में हमारे लोगों पर किस तरह अत्याचार किये जा रहे हैं। अगर हम अब भी नहीं चेते और बहुजन समाज जागरूक नही हुआ तो अपनी दुर्दशा के लिए हम खुद ही ज़िम्मेदार होंगें। 


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