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ज्ञान पर आधारित समाज के निर्माण का 'पैगाम'

रविवार को दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में पैगाम संस्था ने बहुजन आंदोलन पर राष्ट्रीय महाधिवेशन का आयोजन किया,जिसमें पूरे देश में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम में "बहुजनों को अपनी ताकत का अहसास होते ही सफलता के सारे रास्ते खुल जाएंगे" विषय पर चर्चा की गई जिसमें बहुजन समाज के जाने माने बुद्धिजीवियों, युवाओं, महिलाओं, युवतियों और जागरूक महानुभावों ने शिरकत की।



मुख्य अतिथि के रुप में भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश के. जी. बालाकृष्णन ने शिरकत की, विशिष्ट अतिथि के रुप में भूतपूर्व न्यायधीश आर. सी. चौहान, लेखक व चिंतक के. सी. सुलेख, यूपी के पूर्व आईपीएस डॉ कश्मीर सिंह, पूर्व आईएएस एस. आर. लधार भी शामिल हुए। पैगाम के संस्थापक तेजिंदर सिंह झल्ली मार्गदर्शक और भूतपूर्व न्यायधीश बी.एन.वाघ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।



कार्यक्रम में मीरा यादव, टीआर खुन्टे, हरविंदर कौर, ब्रज रंजन मणी, ममता गोसावी,ललित कुमार किशोर गुरू, बिजेंद्र पाल सिंह बघेल, जी.के.सावंत, कमल किशोर कठेरिया, प्रशांत पाटिल, शिव प्रकाशम, मास्टर धर्म पाल, जाकिर हुसैन, जसविंदर सिंह, धनीराम बंजारे, शंकरराव लिंगे मुख्य वक्ता रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के.जी.बालाकृष्णन ने बाबा साहब का ज़िक्र करते हुए कहा कि संविधान द्वारा दी गई राजनीतिक समानता अभी तक सामाजिक समानता में तब्दील नहीं हो पाई है। और समाज में समानता आना सबसे ज्यादा जरूरी है। हम कोई सामाजिक संस्था या एनजीओ बनाते हैं तो ये जरूरी नहीं कि उसकी बात सुनी जाए, सबकुछ राजनीति से कंट्रोल होता है। हमें पता करना चाहिए कि वंचित समाज के उत्थान पर कितना पैसा कहां लग रहा है, हमें समाज की शिक्षा और स्वास्थय पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।



पैगाम के संस्थापक तेजिंदर सिंह झल्ली ने कहा कि हमें समस्याओं से बचने की आदत छोड़नी पड़ेगी। हम समस्या से जुझेंगे तभी उसका हल खोज पाएंगे। और समस्या को खत्म कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमें आज तक ये समझाया जाता रहा है कि सारी समस्याओं का समाधान सत्ता की प्राप्ति में है लेकिन हमें उस चीज का भी महत्व समझना होगा जो दिखाई नहीं देती है लेकिन काम बहुत महत्वूपूर्ण कर रही होती है।



विशिष्ट अतिथि के तौर पर आए डॉ कश्मीर सिंह ने बाबा साहब का हवाला देते हुए कहा कि बाबा साहब ने हमें जो सूत्र दिए थे, शिक्षित बनो,संगठित रहो संघर्ष करो, वे हमेशा से ही प्रासंगिक रहे हैं लेकिन आज इनको आत्मसात करने की सबसे ज्यादा जरूरत आन पड़ी है। हमारे बहुत सारे संगठन अलग-अलग काम कर रहे हैं उन सबको भी एक मंच पर आकर काम करना चाहिए। तभी प्रभावशाली परिणाम सामने आएंगे।



के.सी. सुलेख ने कहा कि ये रोहित वेमुला से लेकर भीमा कोरेगांव की घटना किन षड़यंत्रों और मानसिकता के चलते हुई है और किनके खिलाफ हुई है ये बताने की जरूरत नहीं है, ये वर्तमान सरकार ना सिर्फ दलितों के खिलाफ बल्कि संविधान के खिलाफ काम कर रही है। इसलिए दलित समाज को ज्यादा सतर्क और एकजुट होने की जरूरत है।



कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संदीप केसकर ने कहा कि व्यवस्था द्वारा सबसे ज्यादा बहुजन सताए गए हैं, इसलिए जागृत बहुजनों का कर्तव्य और भी बढ़ जाता है। हमें ग्राउंड लेवल पर जाकर काम करना होगा। और ये काम वही कर सकता है जो जागरूक है जिसे जानकारी है। इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना है और उन्हें जागरूक करना है।


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