img

UPDATE- भीमा कोरेगांव हिंसा: पुणे में दलित की मौत के बाद तनाव बरकरार, हिरासत में 100 लोग

सोमवार को महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक झड़प और आगजनी में एक युवक की मौत के बाद पुणे, मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में तनाव फैल गया है।


हिंसा को लेकर पुलिस ने मुंबई में अलग-अलग जगह से करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं दूसरी तरफ दलितों के आंदोलन की वजह से मुंबई को पुणे से जोड़ने वाली ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। मुंबई में सुरक्षा के लिहाज से अधिकांश स्कूल और कॉलेजों को बंद करा दिया गया है।


गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मुंबई के चेंबूर सहित पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुबह दलित समुदाय ने कई इलाकों में लोकल ट्रेनों की आवाजाही रोक दी थी। हालांकि अब हार्बर लाइन पर स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया है जबकि सीएसएमटी-कुर्ला और मानखुर्द में भी रेल सेवा को फिर से बहाल कर दिया गया है।


पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि हिंसा की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है लेकिन चेंबूर और आसपास के इलाकों में धारा 144 लागू नहीं की गई है। हिंसा के बाद भारिपा बहुजन महासंघ (बीबीएम) नेता प्रकाश अंबेडकर ने दलित युवक की मौत के बाद बुधवार को महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है। 


भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोला है। राहुल ने ट्वीट कर लिखा, आरएसएस और बीजेपी भारत में फासीवादी दृष्टिकोण का केंद्रीय स्तंभ हैं और आज भी ये दलितों को अपने नीचे ही रखना चाहते हैं। रोहित वेमुला, ऊना और अब भीमा कोरेगांव हिंसा इसी फासीवादी सोच के प्रतीक हैं।

आपको बता दें कि 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने पर दलित समुदाय के लोग इस दिन को शौर्य दिवस के तौर पर मनाने के लिए विजय स्तम्भ की ओर बढ़ रहे थे, इसी दौरान भगवाधारियों ने शौर्य दिवस मनाने पहुंचे लोगों में पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई। मृतक की पहचान पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर सानसवाड़ी के रहने वाले राहुल पटांगले के रूप में हुई है। शिकारपुर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है। इस दौरान 40 गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि 10 वाहनों को भीड़ ने पुणे-अहमदाबाद हाइवे पर आग के हवाले कर दिया।

मुख्यमंत्री फड़नवीस ने कोरेगांव हिंसा के मामले में न्यायिक जांच के लिए आदेश दे दिए हैं उन्होंने कहा कि युवक की मौत की सीआईडी जांच की जाएगी, उन्होंने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी ऐलान किया।

पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान पुणे-अहमदाबाद हाइवे पर कुछ देर के लिए गाड़ियों की आवाजाही को रोक दिया गया था. बाद में शाम को हालात सामान्य होने के बाद ही गाड़ियों की आवाजाही शुरू की गई. पुलिस के मुताबिक, फिलहाल गांव में हालात काबू में हैं।

एनसीपी चीफ शरद पवार ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस हिंसा के लिए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब 200वीं बरसी पर इतने ज्यादा लोगों के जमा होने की संभावना थी तो फिर इस कार्यक्रम के लिए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कोरेगांव हिंसा के बाद दलितों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भीमा कोरेगांव में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात करने और दलित समुदाय के लोगों को सुरक्षा देने की मांग की है। 

मुंबई के उपनगरीय इलाके से हिंसा की खबरें आई हैं. मुलुंड, चेंबूर, घाटकोपर और सायन में दलित समर्थकों ने दुकानें बंद कराई और रास्तों को जाम करने की कोशिश की गई हालांकि पुलिस का कहना है कि कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में है। सड़कों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।

आइये आपको संक्षिप्त में बता दें कि दलित समाज 1 जनवरी को शौर्य दिवस के रुप में क्यों मनाता है और बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर हर साल यहां पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने क्यों आते थे। दरअसल भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में लड़ गई थी, ये लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली  के 28 हजार की फौज को धूल चटा दी थी। जिसके बाद से पेशवा राज खत्म हो गया था, इस युद्ध को दलित समुदाय अपनी जीत के तौर पर देखता है, जबकि ब्राह्मणवादी लोग इसे अंग्रेजों की जीत के तौर पर पेश करने की कोशिश करते हैं और अपनी शर्मनाक हार के तौर पर स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इतिहास के पन्ने किसी से छिपे नहीं हैं कि पेशवाई राज में किस तरह अछूतों पर जुर्म ढाए गए थे। 

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े