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दुष्कर्म पीड़ित 10 साल की मासूम बच्ची ने दिया बेटी को जन्म

चंडीगढ़- अपने मामा के दुष्कर्म की शिकार 10 साल की बच्ची ने बेटी को जन्म दिया है। सेक्टर 32 स्थित मेडिकल कालेज में सुबह नौ बजे उसका सिजेरियन किया गया। बच्ची लेबर पेन सहन नहीं कर सकती थी इसलिए 35 हफ्ते में ही ऑपरेशन किया गया। मासूम बच्ची से कहा गया था कि उसके पेट में पथरी है जिसे ऑपरेशन करके निकाल देंगें। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्ची की और नवजात दोनों स्वस्थ हैं लेकिन दोनों को एक हफ्ते तक विशेष निगरानी में रखा जाएगा।
वहीं पीड़िता के पिता ने मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर बच्चे के गोद देने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है। पत्र में यह भी लिखा है कि अपनी बेटी के भविष्य को देखते हुए हम उस बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहते, और बच्चे की शक्ल तक नहीं देखना चाहता। पत्र में जानकारी दी गई है कि इस बारे में प्रशासन की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि यदि पैरेंट़्स बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं तो वे बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाएंगे।
गौरतलब है कि 13 जुलाई 2017 को 10 साल की बच्ची के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए। जहां जांच के बाद पता चला कि बच्ची छह महीने से ज्यादा गर्भवती है। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद बच्ची ने बयान दिया कि उसका मामा ने उसके साथ कई बार गलत काम किया। जिसके बाद पुलिस ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मां की शिकायत पर मामा को जेल भेज दिया। उसके बाद बाद बच्ची के पिता ने गर्भ गिराने के लिए जिला अदालत में याचिका डाली, लेकिन जिला अदालत ने गर्भपात से इंकार कर दिया था जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, सुप्रीमकोर्ट ने गर्भ गिराने से पहले पीजीआई से रिपोर्ट मांगी। पीजीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 29 हफ्ते में गर्भ गिराने से बच्ची और उसके बच्चे की जान को खतरा है। ऐसे में डिलीवरी कराना ही जच्चा-बच्चा के लिए सुरक्षित होगा। रिपोर्ट देखकर सुप्रीमकोर्ट ने भी गर्भ गिराने से मना कर दिया था।

मुख्य संवाददाता
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