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विश्व बैंक की रिपोर्ट में खुली देश की शिक्षा व्यवस्था की पोल, घटिया शिक्षा देने में भारत दूसरे नंबर पर

नई दिल्ली- मंगलवार को जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट ने भारत की शिक्षा प्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। विश्व बैंक की इस रिपोर्ट में दुनिया के 12 ऐसे देशों की सूची जारी की गई है, जहां की शिक्षा व्यवस्था सबसे बदतर स्थिति में है, इस सूची में भारत का स्थान दूसरे नंबर है, जबकि मलावी पहले पायदान पर है। 

विश्व बैंक की यह सूची निम्न और मध्य आय वाले देशों के अध्ययन के नतीजे के आधार पर तैयार की गई है। इस अध्ययन में विश्व बैंक ने कहा है कि बिना ज्ञान के शिक्षा देना विकास के अवसरों को बर्बाद कर देता है। यह ना सिर्फ विकास के अवसर को रोकता है बल्कि दुनियाभर के बच्चों और युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है। विश्व बैंक की इस ताजा रिपोर्ट में वैश्विक शिक्षा में ज्ञान के संकट की चेतावनी दी गई है, साथ ही कहा गया है कि इससे लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरती शिक्षा व्यवस्था से युवाओं के जीवन में अवसर की कमी और कम वेतन का खतरा मंडराता है, इसकी बड़ी वजह है शिक्षण संस्थान छात्रों को प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बेहतर शिक्षा मुहैया नहीं करा रहे है और यह पूरी तरह से विफल हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार दूसरी कक्षा के छात्र  किताब का एक शब्द तक नहीं पढ़ सकते हैं। विश्व बैंक की इस रिपोर्ट मे 'वर्ल्ड डेवेलपमेंट रिपोर्ट 2018- लर्निंग टू रियलाइज एजूकेशंस प्रॉमिस' में कहा गया है कि ग्रामीण भारत में कक्षा तीन के छात्र मामूली सवाल भी नहीं कर सकते हैं। तीसरी कक्षा के तीन चौथाई छात्र मामूली दो अंकों के घटा-जमा के सवाल तक नहीं कर सकते हैं। यही नहीं पांचवीं कक्षा के पचास फीसदी छात्र भी दो अंको का जोड़ घटा नहीं कर पाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना ज्ञान की शिक्षा से गरीबी को मिटाने और समाज में समृद्धि लाने के सपने को पूरा नहीं किया जा सकता है, कई सालों तक इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चे पढ़-लिख नहीं पाते हैं, वह गणित के आसान सवाल भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में ज्ञान का यह संकट सामाजिक खाई, और असमानता को घटाने की बजाय और बढ़ा रहा है।


विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष जिम योंग किम ने कहा कि ज्ञान का संकट नैतिक और आर्थिक दोनों तरह का है, अगर लोगों को अच्छी शिक्षा दी जाती है तो वह बेहतर नौकरी, आय और स्वास्थ्य का लाभ हासिल करते हैं अन्यथा गरीबी में जीवन यापन करते हैं। रिपोर्ट में ज्ञान के गंभीर संकट को हल करने के लिए विकासशील देशों की मदद करने के लिए ठोस  कदम उठाने की सिफारिश भी की गई है।

अगर आपका बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है तो शायद ये रिपोर्ट आपको ज्यादा परेशान ना करे, और आप इस खुशफहमी में जी सकते हैं कि आपका बच्चा तो अच्छी शिक्षा ले रहा है। लेकिन भविष्य में सामाजिक असमानता के जो खतरे पैदा होंगे उनसे अपने बच्चे को बचाने के लिए शायद आप उस समय कुछ नहीं कर पाएंगे। इसलिए ज्यादा खुश होने की बजाय चिंता कीजिए कि किस तरह ऐसा माहौल और शिक्षा प्रणाली बनाई जाए कि समाज में बढ़ रही असमानता की खाई कम हो सके।  और जो बच्चे सरकारी स्कूलों में जाने को मजबूर हैं उन्हें भी अच्छी शिक्षा मिल सके। और वे भी मुख्यधारा में आ सकें, और एक ऐसा स्वस्थ समाज बन सके, जिसमें अपराध और असामाजिक तत्व ना हों और सब सुरक्षित और निर्भीक होकर जी सकें।

मुख्य संवाददाता
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