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ये कैसी वैज्ञानिकता ? जाति छिपाने के आरोप में वैज्ञानिक महिला ने अपनी कुक के खिलाफ मामला दर्ज कराया

महाराष्ट्र के पुणे में एक ऐसा मामला सामने आया हैं जहां जातिवाद और पाखंड, वैज्ञानिकता पर हावी पड़ गए। पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक डॉ. मेधा विनायक खोले ने उनके घर में कार्यरत खाना बनाने वाली 60 वर्षीय निर्मला यादव पर धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है। मेधा के अनुसार, उन्हें अपने घर में गौरी गणपति और श्राद्ध का भोजन बनाने के लिए हर साल ब्राह्मण और सुहागिन महिला की ज़रूरत होती है। और निर्मला यादव ब्राह्मण नहीं है और विधवा हैं, इसलिए उन्होंने उसे धोखा दिया है और उनके भगवान को अपवित्र किया है।     

मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्ट जनरल के पद पर कार्यरत डॉ मेधा विनायक खोले का आरोप है कि पिछले साल 2016 में निर्मला ने ख़ुद को ब्राह्मण और सुहागिन बताकर ये नौकरी ली और उस समय उन्होंने अपना नाम निर्मला कुलकर्णी बताया था जबकि वह दूसरी जाति से हैं। डॉ. मेधा के मुताबिक इस साल 6 सितंबर को उनके गुरुजी ने बताया कि निर्मला ब्राह्मण नहीं हैं। मेधा निर्मला की जाति जानने के लिए रात को करीब नौ बजे उनके घर गईं और वहां उनसे दुर्व्यवहार किया और अपना हेंड बैग उनके सिर पर मारा। और ये सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ, वहां मौजूद लोगों और पुलिस ने भी मेधा विनायक खोले को रोकने की कोशिश की और समझाया, लेकिन वो बहुत गुस्से में थीं। उनका गुस्सा यहीं नहीं थमा, उन्होंने  पुणे के सिंहगढ़ रोड पुलिस थाने में निर्मला यादव के खिलाफ धारा 419 (पहचान छुपा कर धोखा देने), 352 (हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 504 (शांति का उल्लंघन करने के इरादे से एक व्यक्ति का अपमान करना) के तहत मामला दर्ज करवाया है।
  
उधर इन सभी आरोपों को खारिज़ करते हुए निर्मला यादव कहती हैं,  कि मैं कभी डॉ. मेधा के पास नौकरी के लिए नहीं गई वो ख़ुद कहीं से पता लेकर मेरे पास आई थीं और न ही मैंने कभी अपनी जाति छुपाई। मैंने उनके घर तीन उत्सवों पर खाना बनाया और उन्होंने अभी तक उसके पैसे नहीं दिए हैं। जब मैंने पैसे मांगे तो उन्होंने मुझे आठ हज़ार रुपये कुछ दिन में देने का वादा किया। मैंने उनकी बात पर विश्वास कर लिया क्योंकि वो एक बड़ी अधिकारी हैं। मैंने कभी नहीं छुपाया कि मैं मराठा समुदाय से हूं और एक विधवा हूं।  बीते 6 सितंबर को मेधा मेरे घर आईं और मुझ पर जाति छुपाने का आरोप लगाया। उन्होंने ये तक कहा कि मेरे कारण उनके भगवान अपवित्र हो गए हैं। उनकी शिकायत के बाद मैंने भी उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है। पुलिस के अनुसार डॉ. मेधा के ख़िलाफ़ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचना), 506 (आपराधिक धमकी देना) और 584 (जानबूझ कर अपमान करना) के तहत एक ग़ैर-संज्ञेय अपराध दर्ज किया है।

ये कैसी वैज्ञानिकता है जो पाखंड और जातिवाद की धुरी से बंधी है, वैज्ञानिकता तो तर्कों पर आधारित होती है, लेकिन हमारे यहां आज भी सबसे ऊपर जातिवाद और पाखंडवाद ही हावी है, और जब तक ये रहेंगे तब तक हम कैसे वैज्ञानिक सोच के हो पाएंगे, ताजा मामला हमारे समाज में पल रही उस मानसिकता की पोल खोलता दिखता है कि आखिर हम कितने भी आधुनिक या वैज्ञानिक हो जाएं लेकिन हम एक स्वस्थ सोच पैदा नहीं कर सकते, जाति से बाहर नहीं निकल सकते।   

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