img

दलित विरोधी उत्तरप्रदेश- रेप के आरोपी के खिलाफ पुलिस ने दस दिन बाद दर्ज किया मुकदमा, पीड़ित परिवार को दबंग देता रहा केस वापस लेने की धमकियां लेकिन पुलिस बनी रही नकारा।

उत्तर प्रदेश- लखनऊ में रेप से आहत दलित किशोरी आत्महत्या के मामले में पीड़ित को न्याय मिलने की जगह उनपर  लगातार मुसीबतों का पहाड़ टूट रहा है। मृतक किशोरी की मां सोमवार से लापता है, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है, जबकि महिला के पति ने पीजीआई थाने में गुमशुदगी की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले में छानबीन की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें मुख्य आरोपी राम सिंह यादव की तरफ से लगातार जान से मारने की धमकियां देकर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन पुलिस लापरवाह बनी हुई है और आरोपियों के हौंसले बढ़ा रही है। योगी सरकार और पुलिस की दलित विरोधी नीतियों का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित लड़की ने 14 अक्टूबर को खुदकुशी की थी लेकिन मामला 10 दिन बाद दर्ज किया और वो भी काफी दबाव और ज्ञापन के बाद।  


इस मामले में बीएसपी समर्थक युवाओं की लखनऊ इकाई की टीम ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर आरोपियों को तुरंत गिरफ़्तार करने, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहयोग और सुरक्षा देने की मांग की है। बीएसपी यूथ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाता है तो वो संघर्ष करने के लिए मजूबर होंगे।  बीएसपी यूथ के पदाधिकारियों ने इस ज्ञापन की प्रतिलिपि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ, डीजीपी, राज्य अनुसूचित जाति आयोग और राज्य महिला आयोग को भी भेजी है।     

आपको बता दें कि 14 अक्टूबर को लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में दलित किशोरी ने दुष्क्रम से परेशान होकर घर के बाहर अपने बाबा की समाधि के पास जाकर ख़ुदकुशी कर ली थी। जानकारी के मुताबिक पड़ोसी राम सिंह यादव किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गया था और वहीं कमरा किराये पर लेकर उसके साथ दुष्कर्म किया था, जिसके बाद किशोरी ने वापस घर पहुंचकर अपने परिजनों को आपबीती बताई थी और कुछ देर बाद ही अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद उसके परिजनों ने स्थानीय पुलिस से लेकर आला पुलिस अधिकारियों को घटना से अवगत कराकर आरोपियों को गिरफ़्तार करने की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टे पीड़ित परिवार आरोपियों के डर से घर में ताला लगाकर कुछ दिन बाहर भी रहा। लेकिन अब मृतक किशोरी की मां संदिग्ध हालात में लापता हो गई है, जिससे पीड़ित परिवार बेहद परेशान है और योगी सरकार से न्याय की उम्मीद लगा रहा है।  

इतने दिन बाद तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई ना होना पुलिस को भी कटघरे में खड़ा करता है । जबकि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी जनसभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये ये कहते नहीं थकते कि उनकी सरकार में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। लेकिन प्रदेश में दलितों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसपर योगी सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। अब देखना है कि इस मामले में पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है ?  

ओम प्रकाश
ओम प्रकाश
ब्यूरो चीफ
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े