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बीएसपी के लिए यूपी नगर निकाय चुनाव के नतीजे संजीवनी साबित हो सकते हैं ?

यूपी में नगर निकाय चुनाव संपन्न हो चुके हैं। बीएसपी को भले ही इन चुनावों में आशातीत सफलता नहीं मिली हो, लेकिन ये चुनाव परिणाम बीएसपी के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं। बीएसपी ने 8 महीने पहले हुए यूपी विधानसभा चुनावों के अपने खराब प्रदर्शन में सुधार करते हुए निकाय चुनावों में कुछ सुधार किया है। शुक्रवार को आए निकाय चुनाव के नतीजों में बीएसपी को 16 नगर निगमों में से मेयर पद की 2 सीटों पर कामयाबी मिली है। मेरठ में बीएसपी प्रत्याशी सुनीता वर्मा और अलीगढ़ में मोहम्मद फुरकान मेयर बने हैं, जबकि सहारनपुर में महज 2 हजार वोटों के अंतर से जीत मिलने से चूक गई। साथ ही झांसी और आगरा में भी दूसरी नंबर की पार्टी रही। इसके अलावा गोरखपुर, फैजाबाद, मथुरा और गाजियाबाद नगर निगमों में बीएसपी के मेयर पद के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे।
 
बीएसपी ने 16 नगर निगमों में पार्षद पद की 147 सीटों पर भी कब्जा जमाया है। बीएसपी ने यूपी की सभी नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी उम्मीद से ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की 29 सीटें, नगर पालिका के सदस्य पद पर 260 और नगर पंचायत के अध्यक्ष पद की 45, नगर पंचायत सदस्य पद की 215 सीटों बीएसपी के खाते में आई हैं। हालांकि बीएसपी आलाकमान ने निकाय चुनाव के प्रचार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।

निकाय चुनाव के ये नतीजे बीएसपी के लिए बेहद मायने रखते हैं, क्योंकि बीएसपी वर्तमान दौर में अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में जनता का उसके पक्ष में फिर से विश्वास जताना एक संजीवनी की तरह है। बीएसपी का काडर माने जाने वाला दलित समाज पार्टी के पक्ष में एकजुट हुआ है और उसके साथ मुस्लिम समाज का भी जुड़ जाना बीएसपी के लिए 2019 में होने वाले आम चुनावों में उसकी राह आसान बना सकता है, जिससे बीएसपी की खोई हुई सियासी जमीन वापसी कर सकती है। ऐसे में बीएसपी आलाकमान के लिए भी बेहद जरूरी हो गया है कि वो निकाय चुनाव में दलित-मुस्लिम गठजोड़ कैसे सहेज कर रखेगी। इसके लिए पार्टी के कर्णधारों को पूरी मुस्तैदी के साथ जनता की कसौटी पर खतरा उतरना होगा और साथ ही जनता से दूरी बनाकर रहने से भी काम नहीं चलेगा। बीएसपी को गठबंधन की राजनीति के सभी समीकरणों पर पैनी नजर रखनी होगी, ताकि सियासत में वजूद कायम रह सके और सत्ता पाई जा सके।   


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1 Comments

  •  
    manish
    2017-12-03

    good news

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