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बजट 2018- किसानों को लुभाने की कोशिश, मध्यम वर्ग की उम्मीदें नहीं हुई पूरी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2018 पेश किया, बजट में किसानों को खास तवज्जो दी गई। वित्त मंत्री ने किसानों के लिए कई लुभावनी घोषणाएं की। अब किसानों को सभी फसलों का न्यूनतम समर्थम मूल्य मिलेगा, अभी कुछ ही फसलों का मिलता है। वहीं ग्रामीण बाजार ई-नैम का भी ऐलान किया गया। इसके अलावा 42 मेगा फूड पार्क भी बनाए जाएंगे। किसानों के कर्ज के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का फंड अलॉट किया गया है। बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ 40,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया है। डीजल और पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

शिक्षा के क्षेत्र में भी कई घोषणाएं की गई। प्री नर्सरी से 12वीं कक्षा तक की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। 24 नए मेडिकल कॉलेज खोल जाएंगे।  बडोदरा में रेलवे यूनिवर्सिटी बनेगी। आदिवासियों के लिए एकलव्य विद्यालय बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश की 40 फीसदी जनता के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। जिससे पचास करोड़ लोगों को सीधा फायदा होगा। वहीं शेयर बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी होगा। नए कर्मचारियों के ईपीएफ में सरकार 12 फीसदी देगी। दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए नई स्कीम लाई जाएगी।

वित्त मंत्री ने बजट 2018 में कहा कि टैक्स देने वाले 19.25 लाख लोग बढ़े हैं। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 12.6 फीसदी बढ़ा है। इस बार सरकार का इनकम टैक्स कलेक्शन 90 हजार करोड़ रुपए बढ़ा है। वित्त मंत्री ने इसे काले धन के खिलाफ मुहिन का असर बताया। बजट 2018 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ 40,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया है। बजट 2018 में किसानों के लिए उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में 100 फीसदी की छूट दी गई है। सरकार ने 1 फीसदी सेस बढ़ा दिया है। पहले सेस 3 फीसदी था अब इसे बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया है। सरकार ने कस्टम ड्यूटी को भी बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। वहीं डीजल और पेट्रोल की कीमत में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है। अब मोबाइल, टीवी से लेकर विदेशी पैन तक खरीदने के लिए ज्यादा रुपए देने होंगे। वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष में विकास दर 7.2 से लेकर 7.4 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया है। इसके अलावा एक्सपोर्ट में भी 17 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। सरकार को 5.95 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

वित्त मंत्री ने कहा कि बाजार में कैश का प्रचलन कम हुआ है। बिटकॉइन जैसी करेंसी नहीं चलेगी। क्रिप्टो करेंसी गैरकानूनी है। बजट 2018 की स्पीच में वित्त मंत्री ने कहा कि अगले 3 साल में सरकार सभी क्षेत्रों में 70 लाख नई नौकरियां पैदा करेगी। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की फिर से शुरुआत कर दी गई है। 40 हजार रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा। मतलब जितनी सैलरी होगी उसमें से 40,000 रुपए घटाकर बचे हुए पैसे पर टैक्स देना होगा। डिपॉजिट पर मिलने वाली छूट 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार की गई। वहीं 250 करोड़ का टर्नओवर करने वाली कंपनियों पर 25 फीसदी टैक्स लगेगा। 99 फीसदी एमएसएमई को 25 फीसदी टैक्स के दायरे में रखा गया है।

बजट 2018 में नए कर्मचारियों के ईपीएफ में सरकार 12 फीसदी देगी। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की सैलरी बढ़ाई जाएगी। बढ़ने के बाद राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख रुपए महीने हो जाएगी। वहीं उपराष्ट्रपति की सैलरी 4 लाख रुपए महीने और राज्यपाल की सैलरी 3.5 लाख रुपए महीने हो जाएगी। सांसदों के भत्ते हर पांच साल में बढ़ेंगे। एयरपोर्ट की संख्या 5 गुना करने की कोशिश की जा रही है। स्मार्ट सिटी के लिए 99 शहर चुने गए हैं। 100 स्मारकों को आर्दश बनाया जाएगा। धार्मिक पर्यटन शहरों के लिए हेरिटेज योजना बनाई जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्री नर्सरी से 12वीं तक की शिक्षा देने पर जोर दिया जाएगा। डिजिटल पढाई को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना बड़ा लक्ष्य है। आदिवासियों के लिए एकलव्य विद्यालय बनाए जाएंगे। बडोदरा में रेलवे यूनिवर्सिटी बनेगी। स्कूलों में ब्लैक बोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे। 

व्यापार शुरू करने के लिए मुद्रा योजना के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का फंड और छोटे उद्योगों के लिए 3,794 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हेल्थ वेलनेस केंद्र बनाने पर 1,200 करोड़ का फंड खर्च किया जाएगा। 10 करोड़ गरीब परिवारों को मेडिकल खर्च मिलेगा। हर परिवार को एक साल में 5 लाख का मेडिकल खर्च मिलेगा। देश की 40 फीसदी आबादी को सरकारी हेल्थ बीमा मिलेगा। 24 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे।

वित्त मंत्री ने 2022 तक हर गरीब को घर देने का ऐलान किया गया है। देश में 2 करोड़ शौचालय और बनाए जाएंगे। सभी फसलों का समर्थन मूल्य मिलेगा अभी कुछ ही फसलों का मिलता है। 4 करोड़ घरों में सौभाग्य बिजली योजना से कनेक्शन दिया जाएगा। नया ग्रामीण बाजार ई-नैम बनाने का ऐलान किया गया। खरीफ की फसल का समर्थन मूल्य उत्पादन की लागत से डेढ़ गुना है। आलू प्याज टमाटर के लिए ऑपरेशन ग्रीन। आलू, प्याज और टमाटर के लिए 500 करोड़ रुपए मिलेंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड पशु पालकों को भी मिलेगा। 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे। हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। अर्थव्यवस्था पटरी पर है। हम 2.5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था हैं। हमारा फोकस गांव के विकास पर होगा। सरकार ने पारदर्शी शासन दिया है। सर्विस सेक्टर में 8 फीसदी की दर से तरक्की हो रही है। सरकारी सेवाएं ऑनलाइन करने का प्रयास किया जा रहा है। 2 से 3 दिन में पासपोर्ट बनकर घर आ जाता है। 1 दिन में कंपनी रजिस्टर हो जाती है। ईज ऑफ लिविंग पर जोर दे रहे हैं। दवाईयां कम कीमत पर बेची जा रही हैं।

बजट में सीनियर सिटिजन को डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर छूट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 सालाना कर दी गई। वहीं, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट भी 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। गंभीर बीमारियों के केस में डिडक्शन लिमिट 1 लाख कर दी गई। जेटली ने कहा, "सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेंसस के मुताबिक, सरकार हर बुजुर्ग, विधवा, अनाथ बच्चे, वंचितों तक सरकार पहुंचने की कोशिश करेगी। इस साल नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत 9,975 करोड़ रुपए के बजट का एलान किया गया।"

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की और 6 रुपए एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। 8 रुपए की यह राहत आम आदमी को इसलिए नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार ने 8 रुपए का रोड सेस लगा दिया है। जिससे पेट्रोल-डीजल पुरानी कीमतों पर ही मिलेंगी।

अरुण जेटली ने बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गवर्नर्स की सैलरी बढ़ाए जाने का एलान किया। प्रेसिडेंट को अभी 1.5 लाख सैलरी मिलती है, उन्हें 5 लाख सैलरी दी जाएगी। वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख की गई। गवर्नर्स को 1.1 लाख की बजाय अब 3.5 लाख सैलरी दी जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इकोनॉमी के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्राइवर की तरह है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ाकर 5.97 लाख करोड़ रुपए कर रहे हैं। हमारे देश को जीडीपी ग्रोथ और रेल-रोड-एयर-इनलैंड वाटर के जरिए देश को कनेक्ट करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपए के बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टारगेट और अचीवमेंट का रिव्यू किया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम प्रगति के जरिए पता चला है कि 9.46 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट फास्ट ट्रैक मोड पर शुरू हो चुके हैं। 2018-19 तक 9000 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे पूरे हो जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत भारत के दूरदराज और पिछड़े इलाकों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण में 5.35 लाख करोड़ की लागत से 35,000 किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे।

मुख्य संवाददाता
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