img

ग़ज़ल- माना दुनिया बवाल है साहिब....

माना दुनिया बवाल है साहिब,
कहाँ इससे निकाल है साहिब।  

ख़ाकसारों की ताजपोशी का,
रोज उठता सवाल है साहिब।  

बाद मुद्दत के आज जीने की,
कोई देता मिसाल है साहिब।  

मरने दे है न मारने वाला,
खूब करता कमाल है साहिब।  

‘तेज’ जुल्मत की निगहबानी में,
करता फिरता धमाल है साहिब।  

<><><>

कुछ तो इस दुनिया से सीख,
लूट-मार और दंगे सीख।  

बात-बात पर धोखा देना,
और सियासी नारे सीख।  

चिकनी चुपड़ी बात बनाना,
करना थोथे वादे सीख।  

चोर-उच्चकी राजनीति से,
कुर्सी के हथकंडे सीख।  

अ आ इ ई छोड़ ‘तेज’ अब,
अँग्रेजी के नुस्खे सीख।

<><><>

कोई बिचारा ख़त लिखता है,
ख़त में अपना कद लिखता है।  

धरती को लिखता है अम्बर,
अम्बर को सरहद लिखता है।  

खेतों खलियानों को जंगल,
बस्ती को मरघट लिखता है।  

फूलों के बिस्तर को पत्थर,
काँटों को मसनद लिखता है।  

‘चंदा को लिखता है रोटी,
रोटी को मक़सद लिखता है।  

लेखक: तेजपाल सिंह तेज (जन्म 1949) की गजल, कविता, और विचार की कई किताबें प्रकाशित हैं-   दृष्टिकोण, ट्रैफिक जाम है, गुजरा हूँ जिधर से आदि ( गजल संग्रह), बेताल दृष्टि, पुश्तैनी पीड़ा आदि (कविता संग्रह), रुन-झुन, खेल-खेल में आदि ( बालगीत), कहाँ गई वो दिल्ली वाली ( शब्द चित्र), दो निबन्ध संग्रह  और अन्य। तेजपाल सिंह साप्ताहिक पत्र ग्रीन सत्ता के साहित्य संपादक, चर्चित पत्रिका अपेक्षा के उपसंपादक, आजीवक विजन के प्रधान संपादक तथा अधिकार दर्पण नामक त्रैमासिक के संपादक रहे हैं। स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर आप इन दिनों स्वतंत्र लेखन के रत हैं। हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किए जा चुके हैं।    


' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े