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योगी की नफरत की भेंट चढ़ा ताजमहल

विश्व के सातवें अजूबे ताजमहल का भारत में होना बेशक हर भारतीय के लिए गर्व की बात हो, लेकिन यूपी सरकार को ताजमहल गौरवांवित नहीं करता, शायद इसीलिए उत्तरप्रदेश के पर्यटन मंत्रालय ने ताजमहल को अपनी बुकलेट में जगह देना मुनासिब नहीं समझा। इस साल यूपी पर्यटन की बनाई गई बुकलेट में ताजमहल को जगह नहीं दी गई है।

उत्तर प्रदेश में हर साल यूपी पर्यटन मंत्रालय की आधिकारिक बुकलेट बनती है। इस बुकलेट में प्रदेश के हर बड़े पर्यटन स्थल के बारे में चित्र के साथ जानकारी भी दी जाती है। हर साल की तरह इस बार भी यूपी पर्यटन ने बुकलेट बनवाई है, लेकिन इस बार ताज को इस बुकलेट में जगह नहीं दी गई है। 32 पन्नों की इस बुकलेट का पहला पेज वाराणसी की गंगा आरती को समर्पित किया गया है। गंगा आरती के भव्य दृश्य के साथ दूसरे पेज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की तस्वीर है। इस तस्वीर के साथ बुकलेट का उद्देश्य लिखा है। उसके आगे पर्यटन विकास योजनाओं के बारे में दिया गया है। पहले पेज के साथ ही छठवां और सातवां पेज भी गंगा आरती को समर्पित किया गया है।

इसके अलावा बुकलेट में गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर को जगह दी गई है। नाथ संप्रदाय से ही जुड़े यूपी के बलरामपुर में स्थित देवी पाटन शक्ति पीठ को भी स्थान दिया गया है। दो पेज सिर्फ गोरखनाथ मंदिर को समर्पित किए गए हैं। इसमें गोरखनाथ मंदिर का फोटो, उसका इतिहास और महत्व लिखा है। इनके अलवा मथुरा, चित्रकुट जैसे धार्मिक महत्व के स्थलों की जानकारी भी दी गई है।

इतना ही नहीं बुकलेट में इस बार अयोध्या को भी शामिल किया गया है। बुकलेट के बारहवें और तेरहवें पेज में अयोध्या के बारे में विस्तार से दिया गया है। रामलीला के चित्रों को भी बुकलेट में छापा गया है। ईको टूरिज्म से लेकर मंदिर टूरिज्म तक को इस बुकलेट में जगह मिली है लेकिन ताजमहल को नहीं।  

ताजमहल को सांप्रदायिकता की नज़रों से देखने वाली यूपी सरकार इस सच से अनभिज्ञ नहीं हो सकती कि हर साल ताजमहल से 20 करोड़ रुपए से ज्यादा का  राजस्व तो टिकट बिक्री से ही होता है, इसके अलावा आगरा जैसे बड़े शहर की अर्थव्यवस्था में भी ताजमहल को महत्वपूर्ण योगदान रहा है, होटल और पर्यटन उद्योग के अलावा आगरा का मशहूर जूता उद्योगा, चर्म उद्योग और पेठा उद्योग भी ताज महल के पर्यटकों के कारण ही इतना फैला है।

आपको याद होगा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जून को बिहार के दरभंगा में एक रैली के दौरान ताजमहल को लेकर विवादास्पद बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ताजमहल एक इमारत के सिवाय कुछ नहीं है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था।

अब सारा मीडिया ये कहकर योगी सरकार की आलोचना कर रहा है कि योगी सरकार ने ताजमहल को भुला दिया। बाल की खाल निकालने वाला मीडिया जानबूझकर योगी के कृत्य को छिपा रहा है। आखिर ऐतिहासिक धरोहर को कैसे भुलाया जा सकता है। आखिर साफ-साफ क्यों नहीं कहा जा रहा कि एक मुख्यमंत्री की, एक पार्टी की नफरत का शिकार हुआ है ताजमहल।

मुख्य संवाददाता
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