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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, संसद के नए कानून बनने तक तीन तलाक पर 6 महीने के लिए लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने आधी मुस्लिम आबादी के हक के में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक पर अगले 6 महीने के लिए रोक लगा दी है। जब तक संसद इस पर कोई कानून नहीं लाती है तब तक तीन तलाक पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को संसद में इसे लेकर कानून बनाने के लिए कहा है। कोर्ट में तीन जज इसे असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं दो जज इसके पक्ष में नहीं थे। इस खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं जिनमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चियन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नज़ीर (मुस्लिम) हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 से 18 मई तक रोज़ाना सुनवाई के बाद फैसले के लिए आज की तारीख तय की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए ये बेहद ख़राब तरीका है। कोर्ट ने सवाल किया था कि जो धर्म के मुताबिक घिनौना है, वह कानून के तहत वैध कैसे ठहराया जा सकता है। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है। गौरतलब है कि शायरा बानो ने तीन तलाक के ख़िलाफ कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें शायरा ने तर्क दिया था कि तीन तलाक न तो इस्लाम का हिस्सा है और ना ही आस्था का। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी तीन तलाक को बुरा, पाप और अवांधनीय कहता है। शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। 

मुख्य संवाददाता
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