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बिखरता विपक्ष…मजबूत होती बीजेपी

हम बात यहां सियासत की करेंगे, लेकिन उससे पहले एक कहावत सुनाना जरूरी है । कहते हैं  ‘एक रहे तो जीत...बंट गए तो हार’  जी हां ये कहावत वर्तमान दौर की राजनीति में विपक्षी दलों पर बिल्कुल सटीक साबित होती दिख रही है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सियासत में बीजेपी को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां मौजूदा सियासी हालात में विपक्षी एकजुटता की सारी रणनीति विफल होती दिख रही है । साथ ही वजूद भी खतरे में पड़ता दिख रहा है ।

विपक्ष की ओर से लगातार ये जताने और संदेश देने की कोशिशें की जा रही हैं कि बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए एक मंच पर एकजुटता का प्रदर्शन करना होगा, लेकिन हर बार विपक्षी एकता की हर उन कोशिशों की वक्त से पहले ही हवा निकलती दिखाई पड़ रही है । तो ऐसे में यहां ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विपक्ष 2019 के लिए बीजेपी की राह आसान बना रहा है ?

वैसे तो आम चुनाव 2019 में होने हैं, लेकिन उसके लिए सियासी बिसात अभी से ही बिछनी शुरू हो गई है । उसी दिशा में पक्ष और विपक्ष अपने-अपने सियासी दांव चलने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के बढ़ते विजय रथ को रोकने के लिए विपक्ष की एकता की दीवार में दरारें साफ दिख रही हैं । 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की सभी बड़ी पार्टियों को एक मंच पर लाने की कवायदें कई बार हुई, लेकिन हर बार इसका नतीजा शून्य ही रहा । कल 27 अगस्त 2017 को पटना में आयोजित होने वाली आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बहुचर्चित बीजेपी भगाओ, देश बचाओ रैली का नतीजा भी कुछ ऐसा ही निकलने वाला है, क्योंकि अब ये साफ हो चुका है कि लालू प्रसाद यादव की इस रैली से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने और बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने किनारा कर लिया है । मायावती ने आरजेडी की पटना  रैली में लालू प्रसाद यादव का मंच साझा करने से साफ इनकार कर दिया है । हालांकि मायावती ने इसके पीछे कुछ तर्क दिए हैं और कुछ शर्तों के साथ बीएसपी का रुख स्पष्ट कर दिया है । मायावती ने कहा है कि बीएसपी एक सेक्युलर पार्टी है और वो बीजेपी के खिलाफ सेक्युलर पार्टियों की एकजुटता और संगठन के लिए तैयार है, लेकिन रैली में शामिल होने वाली ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियां बाद में टिकट बंटवारे को लेकर आपस में लड़ाई और एक-दूसरे की पीठ में छुरा घोपने की कोशिश करती हैं, जो बिहार में हम सब ने हाल ही में देखा है । मायावती ने साफ शब्दों में बता दिया है कि बीएसपी किसी भी क्षेत्रीय पार्टी या राष्ट्रीय पार्टी के साथ तभी मंच साझा करेगी, जब ये तय हो जाए कि किसको कितनी सीटें मिलेंगी ।

इससे पहले ये कहा जा रहा था कि पटना रैली में एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ बीएसपी सुप्रीमो मायावती भी मौजूद रहेंगी और इसी रैली में 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में एसपी-बीएसपी के बीच महागठबंधन का ऐलान हो जाएगा । लेकिन लालू प्रसाद यादव की रैली से मायावती की दूरी ने यूपी में एसपी और बीएसपी के बीच तालमेल की संभावनाओं को बड़ा झटका दे दिया है । इसके साथ ही एसपी के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव ने ये साफ कर दिया है कि अगर अखिलेश यादव किसी भी दल के साथ चुनावी गठबंधन करते हैं तो उन्हें कोई बड़ा फैसला लेना पड़ेगा। मतलब साफ है कि बीजेपी को रोकने के लिए विपक्ष चाहे जो भी कर ले, लेकिन उनके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबले के लिए फिलहाल न तो कोई सर्वमान्य नेता है और न ही ठोस रणनीति है, जिसके बल पर वो बीजेपी के बढ़ते साम्राज्य को रोक सके । बाकि अब आगे देखना है कि लालू प्रसाद यादव की रैली में किस-किस दल का कौन-कौन नेता शामिल होता है और उनकी ये मुहिम कितनी कारगर साबित होती है, इसके लिए अभी इंतजार करना होगा ?  


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