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वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार राजकिशोर का निधन

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार राजकिशोर का निधन हो गया, वे 71 साल के थे, फेफड़ों में संक्रमण के कारण करीब 20 दिनों से उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद उन्हें एम्स के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनका जन्म 2 जनवरी 1947 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था, वे वैचारिक लेखन के लिए जाने जाते हैं,  'तुम्हारा सुख' और 'सुनंदा की डायरी' जैसे उनके उपन्यास के अलावा राजकिशोर ने ‘रविवार’ से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की थी और उन्होंने ‘नवभारत टाइम्स’ दिल्ली में लंबे समय तक पत्रकार के तौर पर काम किया। उन्होंने ‘दूसरा शनिवार’ मैगनीज का संपादन भी किया था। वे लंबे समय तक जनसत्ता, दैनिक जागरण समेत कई अखबारों में समसामयिक विषयों स्तम्भ भी लिखते रहे।

उनकी प्रमुख रचनाओं में  तुम्हारा सुख, सुनंदा की डायरी,  पाप के दिन, पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति, एक अहिंदू का घोषणापत्र, जाति कौन तोड़ेगा, रोशनी इधर है, सोचो तो संभव है, कुछ पुनर्विचार, स्त्रीत्व का उत्सव, गांधी मेरे भीतर, गांधी की भूमि से, अँधेरे में हँसी, राजा का बाजा हैं।

उन्होंने ‘आज के प्रश्न’ पुस्तक श्रृंखला, समकालीन पत्रकारिता : मूल्यांकन और मुद्दे का संपादन भी किया. पत्रकारिता और साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें लोहिया पुरस्कार के अलावा हिंदी अकादमी की तरफ से साहित्यकार सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

करीब दो महीने पहले 22 अप्रैल को उनके 40 वर्षीय बेटे विवेक का ब्रेन हैम्रेज से निधन हो गया था। वे भी पेशे से पत्रकार थे, करीबियों ने जानकारी दी कि उन्हें बेटे की मौत का  गहरा सदमा लगा था। उनके परिवार में अब उनकी पत्नी और बेटी बची है।

मुख्य संवाददाता
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