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'बहुजन भारत-आज की जरूरत', विषय पर विचार विमर्श

नई दिल्ली- 27 अगस्त 2017 को कंस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में बहुजन एकता मंच की तरफ से एक विमर्श ‘बहुजन भारत- आज की जरूरत’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।  इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय समग्र विकास संघ (RSVS) और ‘आमोद ’ ने समन्वयक की सफल भूमिका निभाई । कार्यक्रम में उपस्थित हुए सभी विद्वानों ने बहुजन एकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी आर सी मीणा जी ने मंच पर उपस्थित सभी विद्वानों का स्वागत करते हुए परिचय कराया । साथ ही विषय की रूप रेखा बताई । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर वरिष्ठ पूर्व आईएएस नरेंद्र कुमार, काणेकर, कंवल जीत सिंह, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद कुरील, पी आई जोश समेत हर क्षेत्र से आए लोगों ने अपने-अपने विचार रखे, जिसमें सबका मकसद एक ही था कि बिखरे हुए बहुजन समाज को कैसे एकजुट किया जाए और गड्ढे में पड़े बड़े तबके को बाहर कैसे निकाला जाए ।

कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए मास्टर रामप्रकाश का कहना था कि आज देश की 75 फीसदी पूंजी 10 फीसदी लोगों के हाथों में चली गई है, जो बेहद चिंता का विषय है । लेकिन सरकारें इस और सोच कुछ भी नहीं सोच रही हैं, उल्टा निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं । 1990 के बाद से कोई भी सरकार रही हो, सभी ने निजीकरण को आगे बढ़ाया है । कभी किसी ने सवाल खड़े करने की जरूरत ही नहीं समझी । सरकारें अपने स्वार्थ को लेकर चलती और सोचती हैं, उन्हें बहुजन समाज से कुछ लेना-देना नहीं है ।
  
इसके साथ ही डॉ. जयकरण ने कहा कि आज जो दौर चल रहा है, उसमें जानबूझकर बहुजन समाज के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि अगर समाज के लिए काम करना है तो परिवार को भूलना होगा । इस मौके पर समाजसेविका और शिक्षिका गरिमा भारती ने भी कहा कि हमें उन बच्चों को शिक्षा के दायरे में लाने की मुहिम चलानी होगी, जो शिक्षा से दूर हैं । जेएनयू से पहुंचे प्रदीप नरवार ने भी बोलते हुए कहा कि जब मिर्चपुर कांड की सुनवाई चल रही थी, तो एक जज को ये कहना पड़ा था कि ऐसे माहौल में सुनवाई नहीं की जा सकती । न्यायिक और पुलिस प्रणाली जाति देखकर काम करती हैं, कर्तव्य के आधार पर नहीं, हमें प्रतिक्रिया करनी चाहिए, लेकिन विचारों के साथ । नरेंद्र पाल वर्मा का भी कहना था कि बहुजन समाज सबसे ज्यादा सॉफ्ट टारगेट है, उन्हें तोड़ा जा रहा है और वे आसानी से टूट रहे हैं । ये टूटना ही सबसे ज्यादा खतरनाक है । डॉ. शेर सिंह कहते हैं कि हम सब बराबरी चाहते हैं, लेकिन मनुवादी बराबरी नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि पहले मैं पड़ा था और अब खड़ा हूं, ये सिर्फ बाबा साहब की बदौलत ही संभव हो पाया ।      

जेएनयू में ओबीसी फोरम के लिए काम कर रहे मुलायम सिंह यादव ने कहा कि हम जिस मंच पर हैं, इस मंच की सार्थकता तभी है, जब ये अपने समाज के हाशिए के लोगों के बीच लगाया जाए । वरना इन पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है । बुजुर्ग समाजसेवी हज़ारी लाल ने भी कहा कि शुरू से ही बहुजन एकता होती रही है और टूटती रही है । वो लोग इसी का फायदा लेकर हमारे ऊपर राज कर रहे हैं । हम इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद भी ऊपर नहीं उठ सके हैं । इसलिए अब टूटना नहीं है, अब जुड़े रहने की जरूरत है । इस मौके पर करीब 40 से ज़्यादा वक्ताओं ने अपने विचार रखे और समय की नजाकत को देखते हुए बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील की।  


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