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अभी खत्म नहीं हो सकी है हजारों साल पुरानी सड़ांध, बदस्तूर जारी है छुआछूत


 बांदा- ये खबर उन लोगों के लिए है जिन्हें लगता है छुआछुत खत्म हो गई है, लेकिन लाख छिपाने के बावजूद ऐसी खबरें आती रहती है जिनसे पता चलता है कि दूर-दराज का इलाका हो या महानगर, छुआछूत किसी ना किसी रूप में बदस्तूर जारी है। 

बबेरू क्षेत्र के मुरवल गांव में आज भी ऊपरी जाति के दरवाजे पर लगे सरकारी हैंडपंप में अनुसूचित जाति के लोगों को पानी भरने की इजाजत नहीं है। मुरवाल गांव की अनुसूचित जाति के लोगों की बस्ती में 2 सरकारी हैंडपंप हैं लेकिन दोनों ही खराब पड़े हैं। जिसकी वजह से अनुसूचित जाति के लोगों की बस्ती में रहने वाले लोगों को पानी लेने के लिए दूसरे नल में जाना पड़ता है।

अनुसूचित जाति के लोगों का कहना है कि जो नल लगा है उस हैंडपंप से उन्हें पानी भरने के लिए मना किया जाता है। कारण यह है कि हम लोग दलित हैं और लोग कहते हैं कि जिस नल में हम पानी भरते है वह नल अछूत का हो जाता है। पीड़ितों का कहना है कि अगर उन्होंने नल में पानी भर लिया तो दूसरे लोग नल को धोकर ही इस्तेमाल करते हैं।

पीड़ितों की मांग है कि इनकी बस्ती के नल ठीक कराए जाएं। जिससे इन्हें पानी भरने में कोई दिक्कत ना हो और दूसरों से इनका पानी भरने को लेकर झगड़ा न हो। 

मुख्य संवाददाता
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