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मेरठ में होने वाला आरएसएस का राष्ट्रोदय कार्यक्रम विवाद में घिरा, दलित समाज ने महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास के अपमान से आहत होकर फाड़े होर्डिंग्स

भारत भले ही कथित वर्ण व्यवस्था वाली नीतियों भेदभाव, छुआछूत और जातिवादी मानसिकता को त्याग कर लोकतांत्रिक देशों की कतार में खड़ा होने का दंभ भरता हो, लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि इस आधुनिक भारत में कुछ ऐसे कथित लोग और सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जो दिन-रात नाम तो राष्ट्रवाद का जपते हैं, पर उनकी कार्यशैली और नीतियां अभी भी उसी वर्णवादी व्यवस्था के अनुरूप चल रही हैं। अक्सर उनके कार्यक्रमों और भाषणों में इसकी छाप देखने और सुनने को मिल ही जाती है। ऐसा ही एक मामला मेरठ में सामने आया है। आरएसएस की ओर से 25 फरवरी को मेरठ में आयोजित होने वाले राष्ट्रोदय महासमागम कार्यक्रम के होर्डिंग्स के जरिये वर्णवाद की याद दिलाई गई है। जिसमें बाकायदा कुछ महापुरुषों नाम के आगे कथित चारों वर्णों का जिक्र किया गया है। शहर भर में लगे आरएसएस के इन होर्डिंग्स को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है, जिस पर दलित समाज के लोगों ने महर्षि वाल्मीकि और संत गुरु रविदास के अपमान को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कुछ होर्डिंग्स को फाड़ दिया है।


मेरठ शहर के मुख्य चौराहों पर लगे आरएसएस के 25 फरवरी को होने वाले राष्ट्रोदय कार्यक्रम के होर्डिंग्स को लेकर दलित समाज बेहद गुस्से में है। सोमवार को दलित समाज के कुछ संगठनों ने एकजुट होकर होर्डिंग्स में आरएसएस पर महर्षि वाल्मीकि और गुरु संत रविदास के अपमान का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और शहर के ब्रह्मपुरी, हापुड़ अड्डा चौक, इव्ज चौराहा, कचहरी तिराहा और बेगमपुल लगे होर्डिंग्स फाड़ दिए। दलित संगठनों ने आरएसएस की ओर से लगाए गए इन होर्डिंग्स में दलित महापुरुषों को अस्पर्श लिखने पर गहरी नाराजगी जताई है।


दलितों के प्रदर्शन नेतृत्व कर रहे विपिन मनोठिया ने कहा कि मेरठ क्रांति भूमि है, लेकिन यहां पर लगे आरएसएस के होर्डिंग्स में महर्षि वाल्मीकि और रविदास जी को अस्पर्श लिखा गया है, जिससे हमारी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है, जिसे दलित समाज महर्षि वाल्मीकि, गुरु रविदास जी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। विपिन मनोठिया ने आरएसएस के इस कार्यक्रम का विरोध करने का भी ऐलान किया है और साथ ही आरएसएस से 24 घंटें के भीतर होर्डिंग्स उतारने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेशभर में दलित समाज आरएसएस के कार्यक्रम का विरोध करेगा। हालांकि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने होर्डिंग्स को लेकर दलितों नाराजगी को लेकर उन्हें मनाना शुरू कर दिया है और कई कई स्तर पर वार्ता जारी है।  लेकिन फिलहाल कार्यक्रम पर संकट के बादल मंढरा रहे हैं ।  


शहर भर में लगे आरएसएस इन होर्डिंग्स में सबसे ऊपर लिखा गया है, ‘हिन्दू धर्म की जैसे प्रतिष्ठा वशिष्ठ जैसे ब्राह्मण, कृष्ण जैसे क्षत्रिय, हर्ष जैसे वैश्य और तुकाराम जैसे शूद्र ने की है, वैसी ही वाल्मीकि, चोखामैला और संत रविदास जैसे अस्पृश्यों ने भी की है’। इसके साथ ही कुछ होर्डिंग्स में बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर जी का चित्र भी अंकित है।  


आपको बता दें कि आरएसएस का सबसे बड़ा समागम 25 फरवरी को मेरठ में होने जा रहा है। जागृति विहार एक्सटेंशन में करीब 650 एकड़ भूमि पर होने वाले राष्ट्रोदय कार्यक्रम में 3 लाख आएएसएस कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।  

मुख्य संवाददाता
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