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चारा घोटाले में लालू को 5 साल और जगन्नाथ मिश्रा को 4 साल की जेल

सीबीआई की विशेष अदालत ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के तीसरे मामले पांच साल की कैद और 25 लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। ये मामला चाईबासा कोषागार से 1992-93 में 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। चाइबासा कोषागार से जिस वक्त अवैध निकासी हुई उस समय लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे।

इसके पूर्व भी चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के एक मामले में लालू प्रसाद को पांच वर्ष की सजा हो चुकी है। लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के ही एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा काट रहे हैं। वे फिलहाल रांची के होटवार जेल में हैं। अब चाइबासा कोषागार वाले मामले में भी पांच साल की सजा के बाद उनका ज़मानत पर बाहर निकलना फिलहाल मुश्किल है। इस मामले में कोर्ट ने लालू के साथ पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. जगन्‍नाथ मिश्र सहित कुल 50 लोगों को दोषी माना था, जबकि शेष छह को रिहा कर दिया था।

बुधवार को जिस मामले में लालू व डॉ. जगन्‍नाथ मिश्र को दोषी करार दिया गया, उस पर इसी वर्ष 10 जनवरी को रांची स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने अपनी सुनवाई पूरी की थी और 24 जनवरी को फैसले की तारीख मुकर्रर की थी। चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित 56 लोगों पर ट्रायल चला। झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती पर भी चाईबासा कोषागार मामले में ट्रायल चला है। कोषागार से अवैध निकासी के समय श्री चक्रवर्ती चाईबासा के उपायुक्त थे। इनमें लालू व डॉ. मिश्र सहित 50 लोग दोषी पाए गए।

सीबीआइ ने चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में आरसी 68 ए-96 दर्ज किया था। अनुसंधान के बाद 12 दिसंबर 2001 को चार्जशीट दाखिल किया गया था। लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र के अतिरिक्त इस मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन सेवा निवृत्त अधिकारी, छह पशुपालन अधिकारी, तत्कालीन कोषागार अधिकारी और 40 सप्लायर शामिल थे।

मुख्य संवाददाता
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