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कांग्रेस के 49वें अध्यक्ष बने राहुल गांधी

राहुल गांधी को देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की कमान सौंप दी गई है। सोनिया गांधी के बाद अब कांग्रेस राहुल राज में आगे बढ़ेगी। शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव प्रभार समिति के अध्यक्ष एम रामचंद्रन ने सोनिया गांधी की मौजूदगी में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने का नियुक्ति पत्र सौंपा।

47 साल के राहुल गांधी 132 साल पुरानी कांग्रेस के 49वें अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने दिल्ली में अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यभार संभाल लिया। इस मौक पर पार्टी मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी के समर्थकों की भारी भीड़ देखी गई। लोग पोस्टर और बैनर के साथ पटाखे छोड़कर जश्न मनाते दिखे। साथ ही राहुल के समर्थन में नारे लगाए।

राहुल गांधी की ताजपोशी के दौरान उनकी मां सोनिया गांधी भावुक हो गईं। इस दौरान सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होने कहा कि मैं आखिरी बार कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संबोधन कर रही हूं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी डरने वालों में से नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बचपन से ही हिंसा देखी है। वर्तमान में भी उन पर निजी हमले किए जा रहे हैं, जिससे राहुल और मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की हत्या के बाद वो अपने बच्चों को राजनीति से दूर रखना चाहती थी, लेकिन देश के प्रति अपना कर्तव्य समझते हुए वो राजनीति में आई। सोनिया गांधी ने कहा कि 20 साल पहले वो इसी तरह लोगों के सामने खड़ी थी। उस वक्त वो बेहद डरी हुई थीं। उन्होंने ये भी कहा कि वो राजनीति में आने से पहले सोच नहीं सकती थी कि वो कांग्रेस का संगठन संभालने का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी से विवाह के बाद मैं गांधी परिवार से जुड़ी, इस परिवार ने देश की आजादी के लिए तम मन धन सब न्यौछावर किया। मुझे इंदिरा गांधी जी ने बेटी की तरह अपनाया, उनकी हत्या से मैं सहम गई थी और मैंने तय किया कि पति और बच्चों को राजनीति से दूर रखूंगी। सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर मुझे बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उस वक्त सिर्फ 3 राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी और केंद्र में भी नहीं थी, मेहनत करके पार्टी को यहां तक पहुंचाया। 


कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में राहुल गांधी ने बीजेपी और मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस में फर्क ये है कि वो आग लगाते हैं और हम बुझाते हैं। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि बीजेपी के साथ असहमत होते हुए भी हम बीजेपी कार्यकर्ताओं को भाई-बहन मानते हैं, हम घृणा के खिलाफ प्यार से लड़ते हैं, लेकिन वो आवाज दबाते हैं, जबकि कांग्रेस बोलने की आजादी देती है। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हमारे देश में मिली-जुली संस्कृति पर वार हो रहा है और हर तरफ भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये एक नैतिक लड़ाई है और हमें किसी भी त्याग के लिए तैयार होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता मेरे परिवार की तरह है, कार्यकर्ताओं की संगठन में रक्षा करना मेरा काम है, सभी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनी जाएगी। उन्होंने युवाओं से हिंसा मुक्त भारत बनाने में सहयोग करने की अपील की।

राहुल गांधी की ताजपोशी से कांग्रेसियों में खुशी की लहर है। इस मौके पर कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने पर बधाई दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में भय के माहौल के बीच कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि राहुल गांधी एक अच्छे अध्यक्ष साबित होंगे। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राहुल आज की चुनौतियों का डटकर मुकाबला करेंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि राहुल आने वाली चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं। सुरजेवाला ने कहा कि भूख, भय, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ राहुल देश की पीड़ा को उजागर करेंगे और नए भारत के नव निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस सत्य की राह पर चलती रही है और आगे भी चलती रहेगी। सिंधिया ने ये भी कहा कि राहुल चुनौती को अवसर में बदलेंगे और कांग्रेस को पार्टी को उभारेंगे। सिंधिया का मानना है कि राहुल गांधी में अपार क्षमता है।

कांग्रस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि राहुल के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार होगा। सिद्धू ने कहा कि राहुल गांधी युवाओं की उम्मीदों को पंख लगाएंगे। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर शुभकामनाएं दी हैं। हार्दिक पटेल ने कहा है कि आप मजबूत विपक्ष बनकर जनता के मुद्दे उठाते रहें।

कांग्रेस में राहुल युग की शुरुआत होने पर दिल्ली के अलावा देश के अन्य राज्यों के कांग्रेसी जश्न मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की फोटो लेकर राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए और ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते नजर आए। इसके साथ ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी उत्तराखंड कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड कांग्रेस भवन में एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।

आपको बता दें कि राहुल गांधी 11 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया था। उस वक्त एम रामचंद्रन ने जानकारी देते हुए कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए केवल राहुल गांधी ने ही नामांकन किया था। आपको ये भी बता दें कि राहुल गांधी कांग्रेस का शीर्ष पद संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्य हैं। इससे पहले नेहरू-गांधी परिवार से मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राहुल गांधी को जनवरी 2013 में कांग्रेस का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिसके बाद से पार्टी में उनकी हैसियत दूसरे नंबर की थी। वो फिलहाल अमेठी से कांग्रेस के सांसद भी हैं।

एक नज़र राहुल गांधी के राजनीतिक सफर पर...
कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो 2004 में पहली बार राहुल गांधी ने अपने पिता राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी (यूपी) से लोकसभा चुनाव जीता था...2004 में राहुल गांधी को 66 फीसदी से ज़्यादा वोट मिले थे, 2009 में राहुल गांधी ने दोबारा अमेठी सीट से जीत दर्ज की। इस बार उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा और उन्हें करीब 72 फीसदी वोट मिले थे। साथ ही 2009 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 21 सीटें दिलवाने का श्रेय भी राहुल को मिला। वहीं मोदी लहर के बावजूद 2014 में भी अमेठी से राहुल की जीत हुई, लेकिन उन्हें सिर्फ 47 फीसदी वोट मिले और कांग्रेस पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई। जहां तक बात कांग्रेस संगठन में जिम्मेदारियों की है तो 2007 में राहुल को कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाया गया था। 2007 में ही यूपी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय अभियान में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। 2013 में उन्हें कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया। 2015 में कांग्रेस बिहार में गठबंधन की सरकार में शामिल हुई, लेकिन 2017 में 5 में से 4 राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की हार हुई, लेकिन पंजाब में अकाली-बीजेपी को मात देकर कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी। 

मुख्य संवाददाता
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