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गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में देशभर में पत्रकारों ने किया विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2017- पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पर आक्रोशित पत्रकारों को हुजूम दिखा। पत्रकारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और नेताओँ ने भी पहुंच कर रोष जताया। सिर्फ दिल्ली में ही नहीं देशभर में पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन किए और गौरी लंकेश के लिए इंसाफ की मांग की। पत्रकारों ने एकजुट होकर कहा कि हम डरने वाले नहीं है, जो लोग ये सोचते हैं कि हम डर जाएंगे वो गलत हैं। पत्रकार का काम सत्ता के खिलाफ खड़ा होना है ना कि सत्ता के पक्ष में।    

‘द वायर’ के एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि विरोध चाहे जितना भी हो, हम डर कर पीछे नहीं हटेंगे। कोल्हापुर से आईँ गोविंद पनसारे की बहू ने बताया कि कैसे पनसारे हत्याकांड की जांच ठहरी हुई है, और मुंबई हाईकोर्ट की पहल पर हत्याकांड की जांच आगे बढ़ी है। पत्रकार रवीश कुमार ने कहा कि गौरी लंकेश की मौत पर अभद्र भाषा और छींटाकशी कर रहे लोगों को किस तरह देश की सत्ता का मौन समर्थन हासिल है। हिंद स्वराज के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि ये व्यक्ति की नहीं, विचार की हत्या है। लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार परॉंजय गुहा ठाकुरता ने गौरी की हत्या को भारतीय मीडिया के इतिहास में एक ‘‘निर्णायक क्षण’’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि खुली सोच की गुंजाइश कम होती जा रही है। वे ऐसे लोगों को चुप कराना चाहते हैं जो सत्ता का सामना सच से कराना चाहते हैं। हम चुप नहीं रह सकते, क्योंकि वे तो यही चाहते है। बिल्कुल चुप न रहें। यह उनकी कामयाबी होगी।’’

 पत्रकारों के इस हुजूम में लेफ्ट के कई नेता भी नजर आए, यहां सीताराम येचुरी, डी राजा और मोहम्मद सलीम दिखे, गौरी लंकेश की हत्या के साथ एक आजाद आवाज थम गई है, ये एहसास सबको है कि कहीं न कहीं ये दूसरों को भी डराने की कोशिश है, लेकिन देश भर में पत्रकारों का जुटा ये हुजूम बताता है कि हमारे यहां लोकतंत्र की जड़ें भी गहरी हैं और इसे बचाए रखने के लिए लड़ने का जज्बा भी पूरा है।

मुख्य संवाददाता
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