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ओडिशा- जगन्नाथ मंदिर में ‘दलित’ राष्ट्रपति कोविंद के साथ धक्कमुक्की और बदसलूकी, तीन महीने बाद हुआ खुलासा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के साथ ओडिशा के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर में धक्कामुक्की ‘बदसलूकी’ का मामला सामने आया है। राष्ट्रपति और उनकी पत्नी करीब तीन महीने पहले यानी 18 मार्च को मंदिर दर्शन के लिए गए थे।

यह मामला उस समय सामने आया जब जगन्‍नाथ मंदिर प्रशासन ने दोषी सेवकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला किया। राष्‍ट्रपति के कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कुछ सेवक वीवीआईपी कपल के पास पहुंच गए। इन सेवकों ने उनके साथ धक्‍कामुक्की की और कोहनी मारते हुए गर्भगृह जाने का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। 

एक स्थानीय अखबार प्रगतिवादी के मुताबिक, जब राष्ट्रपति पुरी जगन्नाथ मंदिर के सबसे निचले हिस्से में रत्न सिंहासन के पास पहुंचे, तो एक सेवादार ने कथित तौर पर उन्हें रास्ता नहीं दिया। वहीं जब राष्ट्रपति और उनकी पत्नी दर्शन कर रहे थे, तो कुछ सेवादारों ने कथित रूप से दोनों को कोहनी मारी।

दूसरी ओर मंदिर के मुख्‍य प्रशासक और आईएएस अधिकारी प्रदिप्‍ता कुमार मोहापात्रा ने इस मामले को ज्‍यादा तूल नहीं देने की कोशिश की और घटना का पूरा विवरण देने से मना कर दिया। राष्‍ट्रपति के साथ सुरक्षा चूक की यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब तीन महीने पहले ही जगन्‍नाथ मंदिर के सेवकों के दर्शानार्थियों के साथ दुर्व्‍यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

वहीं इस घटना को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया से कांग्रेस नेता सुरेश कुमार ने कहा, ‘हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि जिला प्रशासन क्यों ऐसी स्थिति से बचने में असफल रहा। अब तक सिर्फ सामान्य श्रद्दालुओं को सेवादार परेशान करते थे। अब ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रपति और उनके परिवार को भी इससे नहीं बख्शा गया।

आपको याद दिला दें कि बीते 15 मई को राष्ट्रपति कोविंद अपने परिवार के साथ राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर गए थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये ख़बर आई थी कि राष्ट्रपति को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था, जिसके चलते उन्होंने मंदिर की सीढ़ियों पर पूजा की थी।

दरअसल रामनाथ कोविंद दलित समाज से आते हैं और भारत में कई मंदिरों में आज भी दलितों का प्रवेश वर्जित है। हालांकि इस मामले में ज़िला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की पत्नी को मंदिर की सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होने की वजह बाहर पूजा की गई थी। जबकि राष्ट्रपति भवन ने कहा था कि राष्ट्रपति को कहीं दूसरे कार्यक्रम में जाना था इसलिए वो मंदिर के अंदर नहीं गए और सीढ़ियों से ही पूजा कर ली थी। हालांकि उनकी बेटी मंदिर के अंदर दर्शन करने गई थीं।

मुख्य संवाददाता
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1 Comments

  •  
    Narain Lal
    2018-07-01

    यह तो बाद में तथ्यों को छिपाने के लिए (cover up) इस प्रकार की कहानी मीडिया ने बनाई थी। इनके दिमाग में दलित तो दलित ही चाहें वह किसी पोस्ट पर बैठा है। हिंदुऔ में social order irrevocable है जो कभी upgrade नहीं हो सकता खासकर दलितों के लिए। यदि गलती से एक बार कोई दलित के घर में पैदा हो गया तो तमाम उम्र जिल्लत की जिंदगी जीने पड़ेगी। आप कितने भी प्रयास के बावजूद बृहमणों की जाति में नहीं पहुंच सकते हैं वहां के दरवाजे आप के लिए हमेशा बंद है

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