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पंजाब नेशनल बैंक में हज़ारों करोड़ का घोटाला, 10 अधिकारी सस्पेंड

मुंबईः सरकारी क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक में एक हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पीएनबी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बैंक ने करीब 11360 करोड़ रुपए के गलत ट्रांजैक्शन का पता लगाया है। यह गलत ट्रांजैक्शन मुंबई की एक ब्रांच में हुआ है। बैंक ने एक बयान में कहा है कि ट्रांजैक्शन कुछ चुनिंदा खाता धारकों की सहमति से उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए हुए थे।

बैंक ने इस धोखाधड़ी में शामिल 2 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बैंक के 10 कर्मचारियों को सस्‍पेंड किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। साथ ही बैंक की आंतरिक कमेटी भी मामले की जांच कर रही है। 

पूरे मामले की जड़ मे लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू शामिल है। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे। माना जा रहा है कि पीएनबी के मामले में संदिग्ध लेन-देन बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के जरिए हुआ। 

यह घोटाला कथित रूप से जूलर नीरव मोदी ने किया है। इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगांठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं।’ इन कंपनियों से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। 

अधिकारी ने कहा कि बैंक अब अपनी प्रणाली और प्रक्रियाओं की जांच कर रहे हैं ताकि इस तरह का घोटाले की पुनरावृत्ति न हो। सभी बैंकों से जल्द से जल्द स्थिति रिपोर्ट देने को कहा गया है। वर्ष 2015 में बैंक आफ बड़ौदा में भी दिल्ली के दो कारोबारियों द्वारा 6,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। 

मुख्य संवाददाता
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