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अभी ज़िंदा है साहूकारों का हिंदुस्तान।

उत्तरप्रदेश के कौशांबी जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिस पर आपको विश्वास करने में थोड़ा वक्त लगेगा या फिर आपको लगेगा कि आप फिल्मों के उस दौर में चले गए हैं जब एक साहूकार गरीब का खून चूसने के लिए तरह तरह के हथकंड़े अपनाता था,  जी हां वो सिलसिला अभी भी थमा नही है।  मदर इंडिया वाले सुख़ि लाला अभी भी फन उठाए खड़े हैं। कौशांबी थाना इलाके के उरई असरफपुर गांव में चार साल पहले राजकुमारी की दादी का देहांत हो गया था उस समय उनके पति राम कैलाश मजदूरी करने गुजरात गए हुए थे, रुपए न होने के कारण शव 24 घंटे से ज्यादा घर मेें ही पड़ा रहा। राजकुमारी ने मजबूर होकर गांव के साहूकार से 1800 रुपए लिए (साहूकार ने 1800 रुपए की कीमत का आंतिम संस्कार का सामान दिलवाया)। अब चार साल बाद जब राम कैलाश साहूकार के पैसे वापस देने गए तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, साहूकार ने ब्याज लगाकर 1800 रुपए के चार लाख रुपए बना दिए, और धमकी दी, अगर 15 दिनों में ब्याज समेत सारा पैसा नही लौटाया तो वो उनके मकान पर कब्ज़ा कर लेगा। जब राम कैलाश और उनकी पत्नी शिकायत करने थाने पहुंचे तो पुलिस वाले उनकी सुनने को तैयार नही है और साहूकार के खिलाफ किसी तरह की कोई ठोस कार्रवाई नही कर रहे हैं। उधर 15 दिन का समय पूरा होने में अभी दो दिन बाकी हैं लेकिन पुलिस कोई सुनवाई नही कर रही है और साहूकार के गुंडे रोज आकर मकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं। राम कैलाश और राजकुमारी इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं,  अब कौशांबी के एडिश्नल एसपी आशुतोष मिश्रा ने जांच करके मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इतनी कठोर घटना हमें आइना दिखाकर बता रही है हम कितने प्रगतिशील, उन्नत, और संवेदनशील समाज का हिस्सा है, दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी साहूकारों की जाति घात लगाए मज़बूर लोगों को निशाना बना रही हैं और हमारे पुलिस, प्रशासन साहूकारों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं,  आखिर क्यों हम आजादी के 70 साल बाद भी ऐसी घिनौनी व्यवस्था को खत्म नही कर पाए हैं, लगता है इस व्यवस्था को बनाए रखने के पीछे एक विशेष वर्ग के निहित स्वार्थ ही नही मानसिकता भी  हैं जिसमें साहूकार को जीवित रखने वाले कानून की आ़ड़ में व्यवस्था को पोषित कर रहे हैं।  


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