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“अच्छे दिन” का खेल खत्म, “न्यू इंडिया” का शुरू

प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आप वक्ता बहुत अच्छे हैं इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन एक अच्छा वक्ता होना ही सबकुछ नहीं होता, तथ्य भी अपने आप में बहुत महत्व रखते हैं, अगर आप तथ्यों पर बात नहीं करते हैं तो आपकी विश्वसनीयता खराब होती है। लेकिन शायद आप इस बात से सहमति ना रखें। क्योंकि आप और आपके नुमाइंदे शायद इसी ट्रेक पर काम करते हैं कि एक झुठ को चिल्ला चिल्लाकर बोलो तो झुठ सच मान लिया जाता है। लेकिन लालकिले की प्राचीर को चुनावी मंच समझना उसका अपमान है। आप जब बोलना शुरू करते हैं तो ऐसा लगता है कि आप बोलने के लिए बहुत आतुर रहे होंगे। 15 अगस्त पर ध्वजारोहण के बाद देश को संबोधित करने की परंपरा एक मर्यादित परंपरा है जिसे इसीलिए बनाया गया था कि प्रधानमंत्री अपने किए गए कामों का लेखाजोखा जनता के सामने रखेंगे और भविष्य की योजना बताएंगे। लेकिन आप फौरी तौर पर ही हाथ हिला हिलाकर कर और तालियां बजा-बजाकर ऐसा बोलना शुरू करते हैं कि सामने वाला आपकी बॉडी लेंग्वेज में ही उलझ कर रह जाए। आपके गवर्नर साहब कहते हैं कि पता नहीं नोटों की गिनती कब तक चलेगी, लेकिन आप लालकिले से आकर बताते हैं कि तीन लाख करोड़ रुपए बैंकिंग सिस्टम में आ गए हैं, इसके अलावा दो लाख करोड़ रुपए का काला धन बैंक पहुंच चुका है। अब सवाल उठता है कि जो आंकड़े वित्त मंत्रालय के पास नहीं है, आरबीआई के गवर्नर के पास नहीं हैं वो आपके पास कहाँ से आ गये ? अगर आप सही बोल रहे हैं तो आपका सोर्स क्या है, क्या आरबीआई और वित्त मंत्रालय से इत्तर भी कोई संस्था है जो वित्त से संबंधित आंकड़े मुहैया कराती है। या फिर ये मान लिया जाए कि संसद में गोलमोल वाली परंपरा लालकिले तक आ गई हैं। नोटबंदी पर बोलने से पहले कम से कम ये तो सोच लेते कि जो फायदे आपने नोटबंदी के वक्त गिनवाए थे वो कितने अंजाम तक पहुंचे हैं। आपने खुद ही ये बोलकर लोगो से सुझाव मांगे थे कि लालकिले का मंच अकेले प्रधानमंत्री का नहीं होता बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों का होता है, फिर जब लोगों ने आपसे सवाल किए तो आप सब गोलमोल कर गए। आपकी ऐसी बातों से लगता है कि आप कितने संवेदनशील और कितने अलग प्रधानमंत्री हैं। जब लोग आपसे जानना चाहते थे कि आपने जितने रोजगार देने का वायदा किया था वो दिए या नहीं, लेकिन आप इतना बड़ा सवाल गड़प कर जाते हैं, आपने दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, आपने दिया तो कुछ नहीं, हां दो करोड़ लोगों को बेरोजगार जरूर कर दिया। आस्था के नाम पर बढ़ती हिंसा पर आप हमेशा कहते हैं कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ करते कुछ नहीं हैं। भ्रष्टाचार पर लोगों ने आपसे सवाल किया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। लगातार बढ़ती जनसंख्या पर आप क्या कर रहे हैं इस पर भी आपने कुछ नहीं कहा। लोगों ने जानना चाहा था कि आपकी विदेश यात्राओं से देश को क्या लाभ हो रहा है लेकिन आप ये कहकर आगे बढ़ गए कि पूरी दुनिया में सबने भारत का लोहा माना है। लोग जानना चाहते थे कि आपका आधे से ज्यादा कार्यकाल पूरा हो गया है फिर अच्छे दिन कब आते हुए दिखेंगे लेकिन आप अब न्यू इंडिया में उलझाने में लग गए हैं। सब से ज्यादा सैनिक आपके कार्यकाल में मारे गए हैं लेकिन आप फिर भी ताकतवर बने हुए हैं। सबसे ज्यादा हिमाकतें पाकिस्तान ने आपके सामने ही की हैं लेकिन फिर भी वो आपसे डरता है। आप सात सालों तक जीएसटी को अटकाए रखते हैं लेकिन अब उसकी तारीफ करते नहीं थकते हैं। आप भारत जोड़ों का नारा देते हैं लेकिन सबसे ज्यादा भारत आप ही के कार्यकाल में टूटता दिख रहा है। आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, धार्मिक हिंसा, जातीय हिंसा, सबसे ज्यादा आपके राज में होते दिख रहे हैं, राजनीति में बेशर्मी और भ्रष्टाचार का जो रूप आपके कार्यकाल में देखने को मिला, वो कभी नहीं दिखा।  लेकिन आप इन सब समस्याओं पर बात ना करके सिर्फ अपना झण्डा बरदार करने में लगे हैं, और उसके लिए ऐन-केन-प्रकरेण कुछ भी करने को तैयार हैं। अंत में यही कहूंगा कि आप बातें तो बहत अच्छी-अच्छी करते हैं, लेकिन काम...?


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