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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की भेंट चढ़ा मासूमों का जीवन, ऑक्सीजन की कमी के चलते 37 बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्म और राजनीति भूमि गोरखपुर इन दिनों ख़ास चर्चा में है । वजह यहां के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का खामियाजा इंसेफलाइटिस जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे 37  मासूम बच्चों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा । इस मामले में मौत का कारण चाहे ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होना रहा हो या मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की कारगुजारियां, लेकिन उन बच्चों का क्या कसूर था, जिनकी जिंदगी का सफर शुरू होते ही समये से पहले ख़त्म हो गया ।
जानकारी के मुताबिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू और इंसेफलाइटिस के लिए बनाए गए वार्ड में 9 अगस्त की रात क़रीब साढ़े 11 बजे से ही ऑक्सीजन की सप्लाई गड़बड़ा गई थी, जो 10 अगस्त की  सुबह 9 बजे तक बार-बार बाधित होती रही और रात 8 बजे इंसेफलाइटिस वार्ड में आक्सीजन सिलेंडर से की जा रही सप्लाई रुकी तो इसे लिक्विड आक्सीजन से जोड़ा गया, वो भी रात 11 बजे खत्म हो गई । इसके बाद देर रात डेढ़ बजे तक सप्लाई ठप रही, जिससे वार्ड में हाहाकार मच गया । आनन फानन में तुरंत आक्सीजन सिलेंडर की गाड़ी आई तो सप्लाई शुरू हो सकी और फिर 11 अगस्त सुबह तक फिर ऑक्सीजन खत्म हो गई। वैसे तो दो दिन पहले ही ऑक्सीजन के संकट की जानकारी अस्पताल को थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया और इस सारी लापरवाही ने 45 बच्चों की जान ले ली । 
ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने करीब 69 लाख रुपये बकाया होने पर आपूर्ति ठप करने की सूचना दो दिन पहले ही प्रिंसिपल को दे दी थी । गुरुवार को सेंटर पाइप लाइन ऑपरेटर ने प्रिंसिपल, एसआईसी, एचओडी एनेस्थिसिया, इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी अधिकारी को पत्र के जरिए दोबारा लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का स्टॉक बेहद कम होने की जानकारी दी थी । इन सब जानकारियों और ऑक्सीजन सप्लाई रुकने की बात पहले से पता चल जाने के बावजूद ऑक्सीजन पूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए किसी तरह के इंतज़ामात नहीं किए गए । जिसका परिणाम 11 अगस्त को शाम को करीब सवा 4 बजे 22 बच्चों की मौत होने की ख़बर के रूप में सामने आया । कुछ देर बाद मरीजों की मौत का ये आंकड़ा बढ़कर 30 तक पहुंचा और फिर सीधे 37 तक पहुंच गया ।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मरीजों की मौत की ख़बरों को कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन ने दबाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तब तक बच्चों की मरने की ख़बरें दूर तक फैल गई थीं । कुछ देर बाद गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने माडिया से बातचीत में बच्चों के मरने की पुष्टि तो की, लेकिन वजह का कारण नहीं बताया । उन्होंने ऑक्सीजन की कमी के चलते मौतें होने से साफ इनकार किया और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक/इंसेफेलाइटिस विभाग प्रभारी डॉ. कफील खान ने भी ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने के कारण मौतें होने से साफ इनकार किया था । इसके साथ ही लखनऊ में भी योगी सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बाकायदा सूचना विभाग के जरिये सरकार के प्रवक्ता का बयान जारी कर दिया, जिसमें बीआरडी में हुई बच्चों की मौत की घटना का खंडन किया और ख़बरों को पूरी तरह भ्रामक करार दिया । लेकिन सच तो सच होता, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता और ना ही जिम्मेदारी लेने से बचा जा सकता है । खैर सरकार को भी समझ आ गया कि अब ख़बर का खंडन करने से अच्छा है कार्रवाई की तरफ बढ़ा जाए । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रात में ही लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का अमला गोरखपुर रवाना कर दिया और सुबह होत ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन को भी गोऱखपुर भेज दिया । जहां दोनों मंत्रियों ने बीआरडी मेडिकल पहुंचकर हालात का जायजा लिया । दोनों मंत्रियों ने गोरखपुर में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और घटना के तथ्यों को लेकर मीडिया पर ही ठीकरा फोड़ दिया । स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की मौत एक साथ नहीं हुई हैं और ऑक्सीजन की कमी के कराण से भी इनकार किया, बल्कि मौत होने का अलग-अलग कारण बताया ।
 मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये तक कह दिया कि हर साल अगस्त महीने में ज़्यादा मौतें होती हैं । उन्होंने  पिछली सरकारों और पिछले 3 साल में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों का आंकड़ा पेश कर मामले को हल्का करने की कोशिश की । दोनों मंत्रियों ने यहां मेडिकल कॉलेज में हुई इस हृदय विदारक घटना में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की । उसके बाद दोनों मंत्रियों ने शाम को लखनऊ पहुंच कर मुख्यमंत्री को हालात से अवगत कराया । जिसके तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी ने सभी मंत्रियों और सभी विभागों के प्रमुख सचिवों की आपात बैठक बुलाई, जिसमें मामले को लेकर मंथन हुआ और फिर मुख्यमंत्री ने भी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर मीडिया को मामले की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री योगी ने भी मंत्रियों और अधिकारियों की तरह ही मीडिया में आई ख़बरों और तथ्यों को लेकर नाराजगी जाहिर की । उन्होंने मीडिया के तथ्यों को पूरी तरह नकारा और नसीहत देते हुए सही से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने की सलाह दी । मुख्यमंत्री योगी ने इस मामले में मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी के गठन की घोषणा की । वहीं तब तक इस मामले ने सियासी रंग ले लिया और यूपी के विपक्षी दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ हमलावर रुख दिखाते हुए निशाना साधा और मामले में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी । सियासी दबाव में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ घटना के 48 घंटे बाद 13 अगस्त को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को साथ लेकर गोरखपुर गए और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहुंच कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने गोरखपुर में ही मीडिया को संबोधित करते हुए फिर वही तथ्यों वाली बात दोहराई और कहा कि मीडिया के लोगों को ख़ुद बीआरडी में मौके पर जाकर रिपोर्टिंग करनी चाहिए, सही घटना के सही तथ्य पेश करने को कहा । उन्होंने प्रदेश सरकार पर संवेदनहीन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया । उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस मामले में जांच के बाद दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी,जो मिसाल बनेगी । फिलहाल मामले में दूसरी कार्रवाई के नाम पर पीडियाट्रिक/इंसेफेलाइटिस विभाग के प्रभारी डॉ. कफील खान को पद से हटा दिया गया है और मुख्य सचिव के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है, जो जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सरकार देगी । अब देखते हैं कि सरकार इस पर क्या कदम उठाएगी, लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस से ग्रस्त बाल रोगियों की लापरवाही से मौतें होना मेडिकल प्रबंधन,जिला प्रशासन के साथ-साथ यूपी सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान जरूर खड़ा करती है । ‘पड़ताल’ परिवार उन मासूमों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिनकी असमय ही अपने परिवारों से हमेशा-हमेशा के लिए बिछड़ना पड़ा ।         

मुख्य संवाददाता
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