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लाखों-करोड़ों दलित बच्चों की प्रेरणा बने कल्पित

राजस्थान के कल्पित ने जो इतिहास रचा है वो कल्पना से परे है, कल्पित ने वो कर दिखाया है जो इतिहास में कभी नही हुआ, पहली बार 360/360 अंक लाना एक इतिहास है जो आज तक कोई छात्र नही बना पाया,  और वो भी ऐसा छात्र जो दलित समुदाय से संबंध रखता है, उन्होंने ना सिर्फ एससी, एसटी कैटेगरी में टॉप किया है बल्कि जनरल कैटेगरी में भी सबको पछाड़ दिया है, दरअसल दलित समाज से आने वाले कल्पित वीरवल और टीना ढाबी जैसे होनहार हमें आने वाले भारत के सुनहरे भविष्य का संदेश दे रहे हैं कि अगर हमारे साथ भेदभाव ना किया जाए हमें भी स्वस्थ माहौल में मौके और अवसर दिये जाएं तो हम एक ऐसे भारत की तस्वीर रच सकते हैं जिसमें भारत सबसे ऊंचे पायदान पर खड़ा दिखेगा।  कल्पित बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं, उनके पिताजी पेशे से कंपाउडर हैं और माताजी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं एक भाई MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं, दोनों बच्चों की शिक्षा के स्तर और माता-पिता की नौकरियों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अपने बच्चों को यहां तक पहुचाने के लिए इन माता-पिता ने कितनी मेहनत औऱ संघर्ष  किया होगा।   
दरअसल ये ऐसे लोगों के मुंह पर जोरदार तमाचा है जो दलितों की योग्यता को हमेशा कमतर आंकते हैं, कल्पित दलित समाज के उन लाखों-करोड़ों बच्चों के लिए प्रेरणा हैं जो स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव के शिकार हो रहे हैं दरअसल ये कामयाबी बताती है कि हमें ऐसे ही लोगों के बीच में बैठकर ऐसे ही इतिहास गढ़ने होंगे तभी ये तुच्छ मानसिकता वाले हमारा लौहा मानेंगे। इस जातिवादी मानसिकता के चलते ना जाने कितने दलित छात्रों ने खुदकुशी की और ना जाने कितने ही प्रतिभावान छात्रों ने खुद को अपनी प्रतिभा से विमुख कर लिया, और रास्ते की ठोकरें और गंदगी झेलने को मजबूर हुए, और ऐसे गलत रास्तों पर निकल गए जहां उन्हें जातिवाद का अंधेरा निगल गया। अब जरूरत आन पड़ी है समान शिक्षा व्यवस्था की मांग करने की, ये किसी से छिपा नही है कि इन जातिवादी मानसिकता वालों ने शिक्षा की इतनी बड़ी-बड़ी और महंगी दुकानें खोल दी हैं जिन तक दलित समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा पहुंच ही नहीं पाता है और उसे षड़यंत्र के तहत शिक्षा से दूर कर दिया जाता है या फिर आधा-अधूरा पढ़ा लिखा बनाकर खत्म कर दिया जाता है।    
ऐसे में ये जिम्मेदारी सिर्फ दलित समाज की ही नही बल्कि सरकारों और पूरे समाज की है कि हम अपने बच्चों के लिए ऐसे माहौल तैयार करें जहां वे समान रूप से शिक्षा ले सकें और सम्मानित जीवन के साथ अपना विकास कर सकें और देश को नए आयामों तक पहंचा सकें। तभी समस्त भारत का विकास होगा और भारत अपनी असली पहचान और ताकत दिखा सकेगा, अगर हम दलित समाज और उनके बच्चों को साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं तो ये देश का नुकसान है और देश की प्रगति में बाधा है, और जो लोग ऐसा नकारात्मक माहौल बना रहे हैं आने वाली पीढ़िया और इतिहास उन्हें कभी माफ नही करेगा।   

मुख्य संवाददाता
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