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लालकिले से प्रधानमंत्री ने "न्यू इंडिया" पर दिया जोर

आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी बार ध्वजारोहण के बाद लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। सबसे पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। और कहा कि देश की आजादी, आन-बान और शान के लिए जिन महान आत्माओं ने अपना योगदान दिया मैं उन्हें शत-शत नमन करता हूं। सबसे पहले प्रधानमंत्री ने गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुई घटना पर दुख जताया और कहा कि पिछले दिनों अस्पताल में हमारे देश के कई मासूम बच्चों की मौत हुई। इस संकट की घड़ी में पूरे देश की संवेदनाएं उनके साथ हैं। मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि जनता की सुरक्षा के लिए सरकार कोई भी कमी नहीं रहने देगी। प्राकृतिक आपदाएं हमारे लिए कई बार बड़ी चुनौती बन जाती हैं। पिछले दिनों देश के कई हिस्सों में प्राकृतिक आपदाएं आयी। साल 2022 आने में अभी 5 साल बाकी हैं। आजादी के दीवानों का सपना पूरा करने के लिए यह वक्त काफी है। हम सवा सौ करोड़ भारतीय अगर साथ खड़े हो जाएं तो हम न्यू इंडिया बना सकते हैं। जिस तरह भगवान कृष्ण ने ग्वालों की मदद से गोवर्धन पर्वत उठा लिया था और भगवान राम ने वानरों की मदद से लंका पर जीत हासिल की थी। उसी तरह अगर सवा सौ करोड़ भारतीय एक साथ खड़े होकर न्यू इंडिया का संकल्प लें तो काफी कुछ बदल सकता है। इस साल आजादी का जश्न खास है क्योंकि यह साल ऐतिहासिक चंपारण और साबरमती का शताब्दी वर्ष है। ये इतिहास की ऐसी तारीखे हैं जो हमें कुछ करने की प्रेरणा देती हैं। न्यू इंडिया सुरक्षित हो, समृद्ध और शक्तिशाली हो। जहां हर किसी के पास समान अवसर मौजूद हो। जहां आधुनिक विज्ञान और तकनीक में भारत का दबदबा हो। साल 2018 की 1 जनवरी तारीख काफी अहम है। दरअसल इस दिन 21वीं शताब्दी में जन्म लेने वाले युवा 18 साल के होंगे और उनके पास मौका होगा कि वह देश की विकास यात्रा के भागीदार बने और देश को आगे लेकर जाएं। गरीबों को लूटने वाले आज चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। आज ईमानदारी का उत्सव मनाया जा रहा है। कितने साल से कानून लटके पड़े थे। जिन्हें पास कराया गया। हमने 800 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेनामी संपत्ति जब्त की है। जिससे लोगों में विश्वास बढ़ा है कि देश ईमानदार लोगों के लिए है। वन रैंक वन पेंशन, जीएसटी जैसे कानून पास हुए हैं। देश तेजी से विकास कर रहा है। इस दौरान रेल, सड़क, बिजली, और खेती के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। गुड गवर्नेंस का फायदा यह हुआ है कि देश में निर्णय लेने की क्षमता का विकास हुआ है। जिससे भारत की साख विश्व में बढ़ी है। उसी का नतीजा है कि आज आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम अकेले नहीं है। जम्मू कश्मीर में विकास, उन्नति लाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाएं, इसको लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। घाटी में समस्या ना गाली से सुलझेगी ना गोली से सुलझेगी, समस्या सिर्फ गले लगाने से सुलझेगी। लोकतंत्र को हमने मतपत्र तक सीमित कर दिया। न्यू इंडिया में तंत्र से लोक नहीं, लोगों से तंत्र चले ऐसा लोकतंत्र न्यू इंडिया की पहचान बने। हम ऐसा न्यू इंडिया चाहते हैं। स्वराज्य जन्मसिद्ध अधिकार है, लोकमान्य तिलक ने कहा था। नए इंडिया में सुराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है नारा होना चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री ने जय-जवान जय किसान का मंत्र दिया था। हमारे किसान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हमारा देश रिकॉर्ड फसल का उत्पादन कर रहा है। दाल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। हिंदुस्तान में कभी भी दाल खरीदने की परंपरा ही नहीं थी। इस बार मेरे देश के किसानों ने दाल उत्पादन करके गरीबों को पौष्टिक खाना देने का काम किया तो सरकार ने 16 लाख टन दाल खरीदी। पीएम फसल बीमा योजना किसानों का सुरक्षा कवच है। किसान इस योजना से जुड़ गए हैं। ये संख्या पौने छह करोड़ तक पहुंची चुकी है। 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से मेनपावर के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। नौजवानों को बिना गारंटी बैंकों से पैसा मिले,  इसके लिए अभियान चलाया। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण करोड़ों नौजवान पैरों पर खड़े हुए हैं। नौजवान दूसरों को रोजगार दे रहा है। वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाने के लिए हमने 20 यूनिवर्सिटियों से कहा कि हम आपको 1000 करोड़ की मदद करेंगे। पिछले 3 साल में 6 आईईटी, 7 आईआईएम, 8 नए ट्रिपल आईटी खोलने का काम किया गया है। वो बहनें जो तीन तलाक की वजह से पीड़ित हैं, उन्होंने आंदोलन खड़ा किया। पूरे देश में तीन तलाक के खिलाफ एक माहौल बना। इस आंदोलन को चलाने वाली बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। उनकी इस लड़ाई में हिंदुस्तान पूरी मदद करेगा, वे सफल होंगी, ऐसा मुझे भरोसा है। कभी-कभी आस्था के नाम पर लोग ऐसा काम करते हैं कि देश का ताना-बाना उलझ जाता है। ये गांधी और बुद्ध की भूमि है। सबको साथ लेकर चलना हमारी परंपरा का हिस्सा है। आस्था के नाम पर हिंसा को बल नहीं दिया जा सकता है। ये देश को बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगा। मैं देशवासियों से आग्रह करूंगा कि 1942 में भारत छोड़ो नारा था,  आज भारत जोड़ो नारा है। हमें हर व्यक्ति,  हर तबके और समाज के साथ आगे बढ़ना है।    

मुख्य संवाददाता
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