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हम चाँद और मंगल पर तो पहुंचे लेकिन धरातल पर नहीं निकल पाए नाले से बाहर

कानपुर। बर्रा इलाके की विश्व बैंक कॉलोनी में शनिवार दोपहर को नाले की सफाई करने उतरे तीन प्राइवेट सफाईकर्मी जहरीली गैस की चपेट में आ गए, जिसमें एक सफाईकर्मी की दम घुटने से मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दो अन्य सफाईकर्मियों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दादानगर के रहने वाले 40 वर्षीय प्रकाश प्राईवेट सफाईकर्मी थे। शनिवार दोपहर को पड़ोस में रहने वाले अपने साथी बाबू और रविदासपुरम के गूडडू को लेकर वह बर्रा इलाके की विश्व बैंक कॉलोनी के एच ब्लॉक में भरे पड़े नाले की सफाई करने के लिए गए थे। जिसके एवज़ में इलाके के लोगों ने तीनों सफाईकर्मियों को पचास-पचास रूपयें देना तय किया। उन्होनें इलाके के तीन सीवर खोले लेकिन सफलता नहीं मिली। जिसके बाद प्रकाश 10 फीट गहरें सीवर में बिना मास्क पहने ही उतर गया। टैंक में जहरीली गैस होने के चलते उसका वहीं दम घुट गया। काफी देर तक बाहर ना निकलने पर बाबू उतरा उसके बाद गुड्डू उतरा। जहरीली गैस होने के चलते गुड्डू और बाबू भी बेहोश हो गए। काफी देर होने के बाद जब तीनों सफाईकर्मी बाहर नहीं निकले तो लोगों को कुछ अनहोनी का संदेह हुआ और लोगों ने नाले में झांक कर देखा तो तीनों अचेत पड़े हुए थे। जिसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षेत्रिय लोगों की मदद से तीनों सफाईकर्मियों को बाहर निकाला और निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने प्रकाश को मृत घोषित कर दिया। वहीं अन्य दो को गंभीर हालत में आईसीयू में रखा गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
वर्तमान दौर में इतने आधुनिक संसाधन मौजूद हैं साथ ही नई तकनीक पर आधारित मशीनों के जरिये भी सफाई की जा सकती है। अब ऐसे सभ्य समाज को क्यों नहीं उसी नाले में डूबकर मर जाना चाहिए, जिन्होनें थोड़े से पैसे का लालच देकर उन्हें उस नरक में उतार दिया। क्या प्रशासन को इस घटना के लिए जवाबदेह नहीं होना चाहिए। आखिर ऐसे काम पर रोक क्यों नही लगाई जाती जो मानवीय अस्मिता के ख़िलाफ़ है, और एक पूरे समाज को उसी अमानवीय काम को करने के लिए बाध्य है। 
वैसे तो मोदी सरकार हर समय विकास की बातें करती नहीं थकती, लेकिन आज़ादी के इतने बरस बीत जाने के बाद भी सफाई कमियों से पुराने ढर्रे पर काम कराया जा रहा है। वहीँ सफाईकर्मी भी गरीबी और लाचारी के कारण ये नारकीय काम करने को मजबूर हैं...बेबस हैं। हमारा देश चाहे चाँद पर पहुँच गया है या मंगल पर जीवन तलाश रहा है, लेकिन हमारी आधुनिकता, सामाजिक स्तर पर हमारी सच्चाई जानने के लिए सिर्फ इतना बता देना ही काफी है कि आज के समय में भी जब हम स्वघोषित महाशक्ति बने हुए हैं हम नालों की सफाई के लिए इंसानों को नालों के अंदर भेज रहे हैं।

मुख्य संवाददाता
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