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स्वतंत्रता दिवस पर डॉ एन.सिंह की विशेष कविता

मातादीन
जब
मेरी प्यास को
तुम्हारे धर्म ने
धिक्कारा था मंगल !
तभी मैंने दिया था
तुम्हे
क्रांति का वह सूत्र कि –
जल्दी ही तुम्हारा
ब्राह्मणपना निकल जायेगा
जब तुम
गाय और सूअर की
चर्बी लगे कारतूस
अपने मुंह से खोलकर
भरोगे बंदूकों में
लेकिन बेईमान हाथों ने
नहीं लिखा मेरे योगदान को
इतिहास में 
बना दिया तुम को
नायक – 1857 का
लेकिन अब
जब आई है कलम
ईमानदार हाथों में
वह लिख रही है
मेरी यशोगाथा
अब फिर लड़ा जाएगा - 1857
उन बेईमान और ईमानदार
हाथों के बीच |
 डॉ.एन.सिंह, वरिष्ठ साहित्याकार 


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