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कंवल भारती की कलम से... आज़ादी के सत्तर साल का विकास

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के सिलेंडर न होने के कारण इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित 60 बच्चों की मौत सिर्फ एक आकस्मिक हादसा नहीं है, बल्कि एक नरसंहार है, जिसे कालेज प्रशासन, गैस कम्पनी और सरकार तीनों ने मिलकर किया है। एक सदी पहले के भारत में प्रतिवर्ष लाखों इंसानी जानें हैजा, प्लेग और अकाल से चली जाती थीं, यह वह दौर था, जब देश अस्वच्छता, रूढ़ियों, अन्धविश्वास, गरीबी, भुखमरी और ज़मींदार-सामन्तों के दमन से जकड़ा हुआ था. तब देश के गरीब अन्धविश्वासी लोग इस महामारी को अपना भाग्य और ईश्वर की मर्जी समझ कर जीते थे, उस काल में हमारे स्वराजवादी नेता इस महामारी के लिए अंग्रेज सरकार को पानी पी-पीकर कोसते थे। लेकिन आज़ादी के इन सत्तर सालों में भी हम महामारी को नहीं रोक पाए। यह इसलिए कि हमारे नीति-नियंताओं ने देश के विकास का पूंजीवादी मॉडल अपनाया। इस मॉडल ने गरीबों के विकास पर कम और अमीरों के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया।

इस पूंजी आधारित विकास में गरीब पीछे छूटते जा रहे हैं, जो सिर्फ आश्वासन पर जी रहे हैं, और अमीरवर्ग सारी सुविधाओं का उपभोग कर रहा है, सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी संस्थाएं और उपक्रम कमजोर किये जा रहे हैं और निजी क्षेत्र के संस्थानों और उपक्रमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकारी स्कूल बदहाल हैं, उनमें न ठीकठाक भवन हैं, जहाँ हैं भी तो जर्जर अवस्था में हैं; न शिक्षक पर्याप्त हैं और न शिक्षण के साधन हैं। इसके विपरीत, निजी क्षेत्र के स्कूल कुकुरमुत्तों की तरह उगे हुए हैं, जहाँ पैसे का खेल है, और भरपूर शोषण है. लेकिन इन स्कूलों में गरीबों की अपने बच्चों को भेजने की हैसियत नहीं है, यही स्थिति अस्पतालों की है, सरकारी अस्पतालों में सारी असुविधाएं हैं, और निजी अस्पतालों में सारी सुविधाएँ हैं, सरकारी अस्पतालों में गरीब जाते हैं, जहाँ न हर मर्ज के डाक्टर मिलते हैं, न जाँच-सुविधाएँ हैं, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की मशीनें ज्यादातर खराब रहती हैं, ऊपर से भ्रष्टाचार और लापरवाही मरीजों की जान ले लेती है. जिनके पास पैसा होता है, वे निजी अस्पतालों की दौड़ लगाते हैं, और भारी भरकम बिल चुकाकर जीवन बचा लेते हैं. अब तो सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए भी गरीब महिलाएं
ही जाती हैं. पैसे में जो थोड़े भी सक्षम परिवार होते हैं, वे अपनी महिलाओं को निजी नर्सिंग होम में ही ले जाना पसंद करते हैं, जहाँ सामान्य
डिलीवरी में भी तीस से पचास हजार तक का बिल बैठता है।

इन्सेफेलाइटिस कितनी घातक बीमारी है, इसकी भयावहता का अंदाजा गोरखपुर के मेडिकल कालेज में होने वाली मौतों से ही हो जाता है, यह बीमारी उस क्षेत्र में आज की नही है, बल्कि सालों से बनी हुई है, सवाल है कि इसकी जड़ को समझने और उस जड़ को नष्ट करने की दिशा में कोई शोध कार्य क्यों नहीं किया गया? इन्सेफेलाइटिस बच्चों के मस्तिष्क के टिश्यू पर हमला करता है, जिससे वह सूज जाता है, आम तौर पर यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन से फैलता है, गोरखपुर में जो बच्चे मरे हैं, वे जापानीज इन्सेफेलाइटिस वायरस [JEV] से पीड़ित थे. इसके बारे में कहा जाता है कि यह मच्छर-जनित फ्लेवीवायरस है, और मुख्य रूप से बच्चों को ही शिकार बनाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका कारण गंदगी को मानते हैं, जो गरीबों पर लगाया जाने वाला बहुत ही आसान आरोप है, गंदगी क्या सिर्फ गोरखपुर में ही है, वह देशभर की समस्त मलिन बस्तियों में है, लेकिन जापानीज इन्सेफेलाइटिस गोरखपुर क्षेत्र में ही क्यों फ़ैल रहा है? सरकारों में इस मच्छर के उन्मूलन के लिए अब तक क्या किया? क्या यह सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए? ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग ने कुछ किया नहीं होगा, जरूर किया होगा, पर सरकारी विभाग और संस्थान किस तरह काम करते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। सरकारें भी इस सच्चाई को अच्छी तरह जानती हैं, सरकार चाहे जिस पार्टी की हो, वे सब गरीबों के प्रति उदासीन और बेपरवाह होती हैं. वे उनके प्रति चुनावों के वक्त ही हरकत में आती हैं, और वो भी लुभावने जुमलों के साथ या कुछ खैरात बाँटने की घोषणाओं के साथ, वे नेता भी, जो गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं, सत्ता में आकर अपनी मुक्ति के प्रयास करते हैं, और अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि को भूलकर उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं, जिस रास्ते पर पूंजीवाद
उन्हें लेकर जाता है। यह उनकी मजबूरी भी है, क्योंकि वे अगर ज्यादा गरीब-प्रेम दिखायेंगे, तो अगली बार चुनाव भी नहीं जीत नहीं पायेंगे,
क्योंकि वे गरीब-विरोधी उन्हें वोट ही नहीं देंगे, जिनके हाथों में पूरा चुनाव होता है, लेकिन ज्यादा सच यह है कि उनकी पार्टी का आलाकमान ही उन्हें ‘मुक्त’ कर देगा कि जाओ, तुम्हारी जगह यहाँ नहीं है, मुख्यमंत्री जी, अगर गंदगी जापानीज इन्सेफेलाइटिस की वजह है, तो उसे आप कैसे दूर करेंगे? इस कार्ययोजना पर काम कीजिए, मुसलमानों को हाशिए पर लाने की गंदी राजनीति बाद में कर लेना, और उनकी देश-भक्ति को भी बाद में चेक कर लेना, फिलहाल अपनी देशभक्ति को तो प्रमाणित करो।


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