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गटर का पानी पीकर बीता बचपन, आज हैं प्राइवेट प्लेन और लग्जरी कार के मालिक

नई दिल्ली- मशहूर डॉ कुमार बहुलेयन को गरीबी और भुखमरी विरासत में मिली थी। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने तीन भाई-बहनों को भुखमरी और गटर का गंदा पानी पीने की वजह से मरते हुए देखा। वे खुद लंबी बीमारी से पीड़ित रहे, जिसने इनके शरीर को पूरी तरह तोड़ दिया था लेकिन इन्होंने अपने हौंसले कभी नहीं टूटने दिए, आज डॉक्टर कुमार के पास रॉल्स रॉयस जैसी महंगी गाड़ियां, आलिशान बंगले और अपना प्राइवेट प्लेन है। डॉक्टर कुमार का जन्म केरल के कोट्टायम जिले के एक गांव में हुआ। गांव में पीने का पानी, बिजली, शौचालय जैसी चीजों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। ड़ॉ कुमार के पिता मजदूरी करके घर परिवार का खर्च चलाते थे। इसके चलते कई दिनों तक भूखे पेट रहना पड़ता था। इतना ही नहीं गांव में साफ पानी की कमी के कारण इन्हें गटर के पानी से भी अपनी प्यास बुझानी पड़ती थी।  ऐसे में इन्हें भी हैजा, चेचक, टाइफाइड जैसी बीमारियों से जूझते हुए अपना बचपन बिताना पड़ा। डॉ कुमार को बचपन से ही पढ़ाई का काफी शौक था। जातिवाद के चलते पिता ने एक छोटी जाति के टीचर से कुमार को पढ़ाने के लिए कहा। इस टीचर ने कुमार की आर्थिक मदद भी की। आगे चलकर कुमार ने मेडिकल कॉलेज में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में अव्वल रहने के कारण सरकार ने उन्हें न्यूरोसर्जिकल की पढ़ाई के लिए स्कॉटलैंड भेजा। लेकिन 6 साल बाद जब ग्रेजुएशन की डिग्री लेकर वे भारत लौटे तो उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। नौकरी न मिलने पर कुमार ने कनाडा जाने का निश्चय किया और फिर वहां से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गए। उन्होेंने अपने करियर की शुरूआत अल्बेनी मेडिकल कॉलेज से की इसके बाद 1973 में वह बफैलो युनिवर्सिटी न्यूरोसर्जरी में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम करने लगे। इसी दौरान एक बार डॉ कुमार अपने गांव आए और महसूस किया की गांव की हालत जस की तस बनी हुई थी उन्होंने पूरे गांव को बदलने की शपथ ली। आज उसी गांव के लिए डॉ कुमार ने 130 करो़ड़ रुपए डोनेट किए हैं। डॉ कुमार आधा समय अमेरिका में रहते हैं और आधा समय इंडिया में, 82 साल की उम्र में भी वह गांव में हो रहे सारे काम खुद देखते हैं।

मुख्य संवाददाता
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