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चार आदिवासी परिवारों को डायन करार देकर गांव से निकाला

पश्चिम बंगाल, बालूरघाट- पिछले 15 दिन में चार आदिवासी परिवारों को डायन करार देकर गांव छोड़ने का फरमान सुनाया गया है, प्रत्येक परिवार पर 16 हजार रुपये व एक मन धान का जुर्माना लगाया गया है, कोई रास्ता ना देखकर पीड़ित आदिवासी परिवार प्रशासन की शरण में पहुंचे हैं,  तपन थाना अंतर्गत रामचंद्रपुर के एक व्यक्ति की पिछले दिनों मौत हो गयी. जिसके बाद ग्रामवासी झारखंड के एक ओझा के संपर्क में आये, उसने गांव के चार आदिवासी परिवारों को इस मौत का कारण बताया, और चारों आदिवासी परिवारों के हर व्यक्ति को डायन करार दिया दे दिया, इन चारों परिवारों के सात लोगों को डायन श्राप से मुक्ति के लिए प्रति व्यक्ति  16 हजार रुपया व एक मन धान का जुर्माना लगाया गया, लेकिन जब वे जुर्माना नही भर पाए तो ग्रामवासियों ने चारों परिवार को गांव से बाहर निकाल दिया। पिछले 15 दिन से चारों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, इस आफत से निजात पाने के लिए आदिवासी परिवार तपन थाना व बीडीओ की शरण में पहुंचे हैं, इसी बीच बालूरघाट फाउंडेशन आदिवासी एकेडमी नामक एक स्वयंसेवी संस्था भी उनकी सहायता के लिये आगे आई है, संस्था के सहयोग से पीड़ित आदिवासी परिवार बुधवार को जिला पुलिस अधीक्षक से भी मिले।  पश्चिम बंगाल विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री बच्चू हांसदा ने बताया कि जिला प्रशासन इस मामले को देख रहा है और वह भी अपने स्तर पर पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। उन लोगों को सही-सलामत उनके घरों में प्रवेश कराने के लिये वे प्रयासरत है, जिला अधिकारी संजय बसु ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है, जिला प्रशासन ग्रामवासियों से विचार-विमर्श कर मामले का शांतिपूर्ण तरीके से निपटारा करने की कोशिश कर रहा है।  

मुख्य संवाददाता
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