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जंतर मंतर से नीली क्रांति का आगाज़...

तारीख 21 मई… साल 2017… दिन रविवार... देश की राजधानी दिल्ली के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ। जहां युवा शक्ति दल के बैनर तले भीम आर्मी की आह्वान पर सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के विरोध में लाखों की संख्या में बहुजन समाज के लोग जुटे। बहुजन क्रांति के नए नायक के रूप में उभरे भीम आर्मी के संस्थापक एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ की सोशल मीडिया पर की गई एक अपील पर बुलाए गए इस महाधरना प्रदर्शन में देश के कोने-कोने से ही नहीं विदेशों से भी लोग पहुंचे और पूरे जंतर मंतर को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे, पंचशील ध्वज, नीले झंडों, नीली टोपियों और चंद्रशेखर के मुखौटों से पूरा जंतर-मंतर पाट दिया।     इस मौके पर बहुजन क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद ने मंच पर उपस्थित होकर जन सैलाब का अभिवादन करते हुए उनमें जोश भर दिया। इस दौरान एडवोकेड चंद्रशेखर आज़ाद ’रावण’ ने अपने भाषण की शुरुआत जय भीम के नारे से की। उन्होंने कहा कि मैं बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर जी को मानता हूं और संविधान के दायरे में रहकर ही आंदोलन कर रहा हूं, मैं भगोड़ा नहीं हूं, और मैं जेल जाने से भी नहीं डरता। उन्होंने अपने जोशीले भाषण में कहा कि हम अंबेडकरवादी हैं, कोई नक्सली नहीं, हम ना बिकेंगे और ना ही किसी के सामने झुकेंगे, ये तीसरी आज़ादी की लड़ाई है, ये तब तक चलेगी जब तक हम जीतेंगे नहीं और जब तक हमारे निर्दोष भाइयों को न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई समानता की है...मैं शोषण के खिलाफ लड़ रहा हूं और बहुजन समाज के लिए ऊधम सिंह भी बन सकता हूं। उन्होंने कहा कि यहां न्याय की लड़ाई लड़ने वालों पर झूठे केस लगाते हैं...पैसे देकर खरीदते हैं और जान से भी मरवा देते हैं।चंद्रशेखर ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन संघियों को बौद्ध धर्म से डर लगता है और धर्मांतरण के नाम पर इनकी पतलून गिली हो जाती है, या तो हमारे निर्दोष भाईयों को छोड़ दो वरना हम भारी संख्या में बौद्ध धर्म ग्रहण कर लेंगे वे जस्टिस कर्णन का ज़िक्र करना भी नहीं भूले उन्होंने कहा कि इस देश में हमारे जजों के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है ये किसी से छिपा नही है। उन्होंने कहा कि जज साहब आप हार मत मानना हम आपके साथ हैं, पूरा बहुजन समाज आपके साथ है...     चंद्रशेखर ने अपनी गिरफ़्तारी देने की बात कही और मौजूद लोगों से 23 मई 2017 को देशभर में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने और सभी जिलों के डीएम को ज्ञापन देने की ज़ोरदार अपील की, साथ ही अपनी गैर मौजदूगी में जय भगवान जाटव, रवि कुमार गौतम, रतन सिंह और कमल को आंदोलन चलाने की जिम्मेदारी देने की घोषणा की।
इस मौके पर गुजरात से पहुंचे क्रांतिकारी जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि अगर चंद्रशेखर को कुछ भी हुआ तो सैकड़ों चंद्रशेखर पैदा होंगे। उन्होंने ये भी कहा कि पूरे देश में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके साथ ही मौजूद लोगों एक स्वर में सहारनपुर जातीय हिंसा के दोषियों को जेल भेजने और पीड़ित बहुजनों को आर्थिक मुआवजा देने की पुरजोर मांग की। इस महा धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बहुजन समाज की नारी शक्ति ने शामिल होकर आंदोलन को ताकत प्रदान की। जंतर मंतर पर हुए इस महा धरना-प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पुख़्ता बंदोबस्त किए गए थे। हालांकि जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने बाहर से आने वाले बहुजन समाज लोगों के काफी वाहनों को दिल्ली से बाहर ही रोक दिया था, फिर भी लोग पैदल चलते हुए जय भीम, जय भीम, जय भीम और भीम आर्मी जिंदाबाद, चंद्रशेखर जिंदाबाद के नारे लगाते जंतर मंतर पहुंचे थे।


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