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छत्तीसगढ़- मुख्यमंत्री रमन सिंह की बहू की डिलीवरी के लिए खाली कराया गया सरकारी अस्पताल का पूरा फ्लोर, सामान्य मरीजों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

11 नवंबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की बहू ने एक बेटी को जन्म दिया, उन्हें पोती के जन्म की तो बधाई दी ही गई साथ ही इस बात के लिए भी खूब सराहना की गई कि उन्होंने बेटे अभिषेक की पत्नी ऐश्वर्या की डिलीवरी के रायपुर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल चुना था। लेकिन जब ग्राउंड पर जाकर देखा तो पता चला कि अस्पताल का सैकेंड फ्लोर पूरी तरह उनकी बहू के लिए खाली करवा दिया गया था। पूरा VIP ट्रिटमेंट लिया जा रहा था। और इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि राजधानी का ये सबसे बड़ा अस्पताल जहां मरीजों की भरमार रहती है। उनके इस वीआईपी कल्चर के कारण लोगों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा होगा।

उस मंजिल से जिन महिला मरीजों को शिफ्ट किया गया उससे पूरे अस्पताल में अफरातफरी और परेशानियां खड़ी कर दीं। एक बेड पर दो-दो महिलाओं को शिफ्ट कर दिया गया था। यही नहीं अस्पताल के डॉक्टरों के कमरे को भी पुलिस कंट्रोल रूम में तब्दील कर दिया गया।  

कांग्रेस पार्टी ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए सरकारी अस्पताल में दूसरे मरीजों को नजरअंदाज कर बेटे की पत्नी को वीआईपी ट्रीटमेंट दिलवाने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए इसे अस्पताल के लिए सम्मान की बात बताया है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि किसी महंगे निजी हॉस्पिटल की जगह मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पताल को चुना।

हालांकि अस्पताल के अधीक्षक का कहना है कि हमारे लिए ये गर्व की बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हमारे अस्पताल को चुना। लेकिन साथ ही उन्होंने दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि अस्पताल में 700 बिस्तर ही उपलब्ध हैं लेकिन यहां भर्ती मरीजों की संख्या 1200 हैं। जिससे जगह की काफी कमी है। इसके निर्माण कार्य भी चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं स्वीकारता हूं कि प्रसूता वार्ड में दिक्कत हुई तो हमने 30 बेड की अलग से व्यवस्था की है ताकि उन्हें सिंगल बेड दे पाएं।’

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करते हुए मंत्रियो, अधिकारियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटवा दी थी लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या केवल लाल बत्ती हटवा देने भर से वीआईपी मूवमेंट के समय लोगों को होने वाली परेशानियां कम हुई हैं ? शायद नहीं, प्रधानमंत्री जी सिर्फ लाल बत्ती हटवा देने से वीआईपी कल्चर खत्म नहीं होता, उसके लिए एक सोच, मानसिकता विकसित करनी पड़ती है। जो अभी आपके सिपहसलारों को सीखनी होगी। वरना ये आपकी मुहिम को पलीता लगवा देंगे।

मुख्य संवाददाता
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